महाराव भीमसिंह द्वितीय (शासनकाल: 1940–1947/48 ई.) कोटा रियासत के अंतिम शासक थे। उनका व्यक्तित्व एक कुशल राजनीतिज्ञ, प्रखर खिलाड़ी और आधुनिक सोच वाले राजा का था। भारत की स्वतंत्रता और राजस्थान के एकीकरण में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है।
यहाँ महाराव भीमसिंह द्वितीय के बारे में विस्तृत विवरण दिया गया है:
1. राजस्थान का एकीकरण और भीमसिंह द्वितीय
महाराव भीमसिंह द्वितीय ने भारत की आजादी के समय राजस्थान की रियासतों को एकजुट करने में नेतृत्वकारी भूमिका निभाई:
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राजस्थान संघ (1948): एकीकरण के दूसरे चरण (25 मार्च 1948) में जब ‘राजस्थान संघ’ बना, तो कोटा को उसकी राजधानी बनाया गया।
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राजप्रमुख: महाराव भीमसिंह द्वितीय को इस संघ का ‘राजप्रमुख’ बनाया गया।
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उप-राजप्रमुख: बाद में जब ‘वृहद राजस्थान’ बना, तो उन्हें उप-राजप्रमुख का पद दिया गया। उन्होंने अपनी रियासत का भारत में विलय बहुत ही गरिमापूर्ण तरीके से किया।
2. खेल और अंतरराष्ट्रीय पहचान
भीमसिंह द्वितीय केवल एक शासक ही नहीं, बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के निशानेबाज (Shooter) भी थे:
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ओलंपिक: उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया। वे भारतीय निशानेबाजी टीम के महत्वपूर्ण सदस्य रहे।
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खेलों को प्रोत्साहन: कोटा में खेलों के बुनियादी ढाँचे को विकसित करने में उनका बड़ा योगदान रहा। उनके समय में कोटा में खेल संस्कृति को काफी बढ़ावा मिला।
3. शिक्षा और जनकल्याण (Education & Welfare)
अपने पिता उम्मेदसिंह द्वितीय के विकास कार्यों को उन्होंने आगे बढ़ाया:
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कोटा का औद्योगिक आधार: कोटा में उद्योगों की स्थापना के लिए उन्होंने नीतियों में बदलाव किए, जिसकी वजह से आजादी के बाद कोटा एक बड़े औद्योगिक केंद्र (Industrial Hub) के रूप में विकसित हो सका।
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सामाजिक सुधार: उन्होंने प्रशासन में जनता की भागीदारी बढ़ाने के लिए कई परिषदों का गठन किया।
4. कला और विरासत का संरक्षण
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कोटा संग्रहालय: उन्होंने राजपरिवार की दुर्लभ कलाकृतियों, अस्त्र-शस्त्रों और चित्रों को संरक्षित करने के लिए विशेष प्रयास किए। उनके समय में कोटा की ‘ब्रजराज पेंटिंग्स’ और शिकार के चित्रों को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली।
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धार्मिक आस्था: वे अपने पूर्वजों की तरह भगवान ब्रजराज (कृष्ण) के भक्त थे और उन्होंने मंदिरों की परंपराओं को आधुनिक समय के साथ सामंजस्य बिठाते हुए जारी रखा।
5. ऐतिहासिक स्रोत (Sources)
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राजस्थान के एकीकरण के दस्तावेज: भारत सरकार के रियासती विभाग (States Department) के रिकॉर्ड में महाराव भीमसिंह के विलय पत्र (Instrument of Accession) पर हस्ताक्षर और उनकी भूमिका का विवरण है।
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गौरीशंकर हीराचंद ओझा व डॉ. शर्मा: कोटा के आधुनिक इतिहास पर लिखने वाले इतिहासकारों ने भीमसिंह द्वितीय को एक “लोकतांत्रिक सोच वाला राजा” कहा है।
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पारिवारिक अभिलेख: कोटा के सिटी पैलेस और म्यूजियम में उनके समय के राजकीय आदेश और खेल उपलब्धियों के रिकॉर्ड सुरक्षित हैं।
महाराव भीमसिंह II – मुख्य तथ्य (Table)
| श्रेणी | विवरण |
| भूमिका | कोटा के अंतिम शासक और राजस्थान संघ के राजप्रमुख। |
| प्रसिद्धि | अंतरराष्ट्रीय स्तर के निशानेबाज (Sportsman King)। |
| योगदान | कोटा को राजस्थान संघ की राजधानी बनाना (दूसरे चरण में)। |
| निधन | 1991 ई. (आजादी के बाद भी वे सामाजिक रूप से सक्रिय रहे)। |
निष्कर्ष:
महाराव भीमसिंह द्वितीय ने बदलते समय की आहट को पहचान लिया था। उन्होंने न केवल अपनी रियासत का भारत में शांतिपूर्ण विलय किया, बल्कि एक सामान्य नागरिक की तरह खेलों और सामाजिक कार्यों के माध्यम से देश की सेवा जारी रखी। उनके साथ ही कोटा के शासकों की वह गौरवशाली श्रृंखला समाप्त हुई जो 1631 में राव माधोसिंह से शुरू हुई थी।