राव बरसिंह (शासनकाल: 1343–1372 ई. लगभग) बूंदी के हाड़ा राजवंश के अत्यंत महत्वपूर्ण और पराक्रमी शासक थे। वे संस्थापक राव देवा के वंशज और राव नापू के पुत्र थे। बरसिंह के शासनकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि बूंदी को एक अभेद्य सैन्य शक्ति के रूप में स्थापित करना था।
यहाँ राव बरसिंह के बारे में विस्तृत विवरण दिया गया है:
1. पारिवारिक पृष्ठभूमि (Family)
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वंश: हाड़ा चौहान।
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पिता: राव नापू जी (राव देवा के प्रपौत्र)।
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उत्तराधिकारी: इनके बाद राव बीरू (बीरसिंह) गद्दी पर बैठे।
2. ऐतिहासिक निर्माण: तारागढ़ दुर्ग (1354 ई.)
राव बरसिंह को मुख्य रूप से तारागढ़ दुर्ग (Bundi Fort) के निर्माता के रूप में याद किया जाता है।
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स्थापत्य: उन्होंने 1354 ई. में पहाड़ी की ऊँचाई पर इस विशाल दुर्ग का निर्माण करवाया।
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विशेषता: यह किला अपनी ‘तिलिस्मी’ बनावट के लिए प्रसिद्ध है। इसे राजस्थान के सबसे सुरक्षित किलों में गिना जाता है क्योंकि इसकी ऊँचाई से पूरी घाटी पर नजर रखी जा सकती थी।
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सुरक्षा: दुर्ग के निर्माण से बूंदी को मेवाड़ और मालवा के सुल्तानों के संभावित आक्रमणों से सुरक्षा मिली।
3. युद्ध और सैन्य संघर्ष (Wars)
राव बरसिंह का समय बाहरी आक्रमणों और सीमा विस्तार का था:
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मेवाड़ से संघर्ष: उनके समय में मेवाड़ के शासकों (राणा लाखा के पूर्वज) के साथ सीमाओं को लेकर अक्सर झड़पें होती थीं। बरसिंह ने अपनी चतुराई और शक्ति से बूंदी की स्वतंत्रता को बनाए रखा।
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मालवा के साथ मोर्चा: मालवा के सुल्तानों की नजर हाड़ौती के उपजाऊ और सामरिक क्षेत्रों पर थी। बरसिंह ने उनके छोटे-छोटे हमलों का डटकर मुकाबला किया।
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रणनीति: उन्होंने ‘छापामार’ युद्ध पद्धति और पहाड़ी भूगोल का लाभ उठाकर शक्तिशाली दुश्मनों को भी पीछे हटने पर मजबूर किया।
4. दरबार, लेखक और साहित्य (Court & Sources)
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दरबार: राव बरसिंह का दरबार योद्धाओं और चारणों से भरा रहता था। उन्होंने वीरतापूर्ण संस्कृति को बढ़ावा दिया।
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कवि और स्रोत: * सूर्यमल मिश्रण: ‘वंश भास्कर’ में राव बरसिंह के दुर्ग निर्माण और उनकी सैन्य उपलब्धियों का विस्तृत वर्णन मिलता है।
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कर्नल जेम्स टॉड: टॉड ने तारागढ़ दुर्ग की प्रशंसा करते हुए बरसिंह को एक दूरदर्शी शासक बताया है।
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मुँहणोत नैणसी: इनकी ख्यातों में भी बरसिंह द्वारा राज्य को सुदृढ़ करने के प्रयासों का उल्लेख है।
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5. सामाजिक और धार्मिक कार्य
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कुलदेवी भक्ति: उन्होंने तारागढ़ के भीतर आशापुरा माता के मंदिर को और अधिक सुसज्जित करवाया।
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प्रजावत्सल: उन्होंने दुर्ग के भीतर और बाहर जल संग्रहण के लिए कई कुंडों का निर्माण करवाया ताकि अकाल या घेराबंदी के समय प्रजा को कष्ट न हो।
राव बरसिंह – मुख्य तथ्य (Table)
| श्रेणी | विवरण |
| प्रमुख निर्माण | तारागढ़ दुर्ग, बूंदी (1354 ई.)। |
| पिता | राव नापू। |
| मुख्य उपलब्धि | बूंदी को एक सैन्य शक्ति के रूप में संगठित करना। |
| ऐतिहासिक स्रोत | वंश भास्कर, कर्नल टॉड की रचनाएँ। |
एक रोचक कथा:
राजस्थान के इतिहास में राव बरसिंह के समय की एक प्रसिद्ध घटना ‘नकली तारागढ़’ से जुड़ी है। कहा जाता है कि मेवाड़ के महाराणा लाखा ने प्रतिज्ञा की थी कि जब तक वे तारागढ़ नहीं जीत लेंगे, अन्न-जल ग्रहण नहीं करेंगे। जब असली दुर्ग जीतना कठिन लगा, तो एक मिट्टी का ‘नकली तारागढ़’ बनाया गया। उस नकली दुर्ग की रक्षा के लिए भी कुम्भा हाड़ा जैसे वीरों ने अपने प्राणों की आहुति दे दी थी, जो हाड़ाओं की अटूट स्वामीभक्ति को दर्शाता है।