सामंतसिंह (शासनकाल: 1282–1305 ई.) जालौर के सोनगरा चौहान वंश के पाँचवें शासक थे। वे चाचिगदेव के पुत्र थे। उनका शासनकाल जालौर के इतिहास में एक ‘संधिकाल’ की तरह था, जहाँ एक ओर सुख-समृद्धि थी, तो दूसरी ओर दिल्ली की खिलजी सल्तनत का खतरा गहराने लगा था।
सामंतसिंह के बारे में विस्तृत विवरण यहाँ दिया गया है:
1. शासनकाल और परिस्थितियाँ
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सामंतसिंह ने लगभग 23 वर्षों तक शासन किया।
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उनके शासनकाल के शुरुआती वर्ष शांतिपूर्ण रहे, लेकिन 1290 के दशक में दिल्ली में खिलजी वंश के उदय के साथ ही चुनौतियाँ बढ़ गईं।
2. जलालुद्दीन खिलजी का आक्रमण (1291-92 ई.)
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दिल्ली के सुल्तान जलालुद्दीन खिलजी ने जालौर पर आक्रमण किया था।
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सामंतसिंह ने बहादुरी से उसका सामना किया। हालांकि सुल्तान ने सांचौर तक के क्षेत्र को नुकसान पहुँचाया, लेकिन वह जालौर दुर्ग को जीतने में पूरी तरह सफल नहीं हो सका।
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इस युद्ध में सामंतसिंह को अपनी सैन्य शक्ति को और अधिक संगठित करने की प्रेरणा मिली।
3. अलाउद्दीन खिलजी से प्रारंभिक संघर्ष
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1299 ई. में जब अलाउद्दीन खिलजी की सेना (उलूग खाँ और नुसरत खाँ के नेतृत्व में) गुजरात विजय के लिए जा रही थी, तब सामंतसिंह ने उन्हें अपने राज्य से निकलने का रास्ता देने से मना कर दिया था।
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इस घटना ने दिल्ली और जालौर के बीच कटुता को चरम पर पहुँचा दिया, जिसका परिणाम आगे चलकर कान्हाड़देव के समय भीषण युद्ध के रूप में निकला।
4. पुत्र को सत्ता सौंपना (1305 ई.)
सामंतसिंह एक दूरदर्शी पिता थे। उन्होंने महसूस किया कि दिल्ली के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी की साम्राज्यवादी भूख जालौर के लिए बड़ा खतरा है।
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राज्य की रक्षा के लिए एक युवा और अधिक ऊर्जावान नेतृत्व की आवश्यकता थी।
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इसलिए, उन्होंने अपने जीवनकाल में ही 1305 ई. में अपने पराक्रमी पुत्र कान्हाड़देव चौहान का राज्याभिषेक कर दिया और स्वयं राजकाज से हट गए।
5. ऐतिहासिक स्रोत (Sources)
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मुहणोत नैणसी री ख्यात: इसमें उनके शासनकाल और खिलजी सेना के साथ हुए गतिरोध का वर्णन मिलता है।
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जैन शिलालेख: सामंतसिंह के समय के कई जैन लेख प्राप्त हुए हैं (विशेषकर भीनमाल और सांचौर से), जो उनकी धार्मिक सहिष्णुता और प्रशासनिक कुशलता को दर्शाते हैं।
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कान्हाड़दे प्रबंध: इस ग्रंथ में सामंतसिंह द्वारा अपने पुत्र को सत्ता सौंपने के निर्णय की प्रशंसा की गई है।
सामंतसिंह – मुख्य तथ्य (Table)
| श्रेणी | विवरण |
| पिता | चाचिगदेव |
| शासन काल | 1282–1305 ई. |
| समकालीन सुल्तान | जलालुद्दीन खिलजी और अलाउद्दीन खिलजी |
| सबसे बड़ा निर्णय | जीवित रहते हुए पुत्र कान्हाड़देव को सत्ता सौंपना। |
| स्वभाव | शांतिप्रिय लेकिन अपने राज्य की संप्रभुता के प्रति सजग। |
निष्कर्ष:
सामंतसिंह का व्यक्तित्व एक ऐसे संरक्षक का है जिसने अपने पूर्वजों की विरासत को संभाला और समय की नजाकत को देखते हुए सही समय पर बागडोर अपने योग्य पुत्र को सौंप दी। उनके इसी निर्णय के कारण जालौर ने अलाउद्दीन खिलजी जैसी विशाल शक्ति के सामने वर्षों तक संघर्ष किया।