महाराव दुर्जनसाल (शासनकाल: 1723–1756 ई.) कोटा के हाड़ा चौहान वंश के एक अत्यंत प्रभावशाली और कूटनीतिज्ञ शासक थे। वे महाराव भीमसिंह के पुत्र थे। उनका शासनकाल वह समय था जब मुगल सत्ता पतन की ओर थी और राजस्थान में मराठों का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा था।
यहाँ महाराव दुर्जनसाल के बारे में विस्तृत विवरण दिया गया है:
1. पारिवारिक पृष्ठभूमि (Family Background)
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वंश: हाड़ा चौहान।
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पिता: महाराव भीमसिंह।
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उत्तराधिकार: अपने पिता की मृत्यु के बाद, उनके भाई अर्जुनसिंह गद्दी पर बैठे थे, लेकिन उनकी अल्पायु में मृत्यु के बाद दुर्जनसाल कोटा के शासक बने।
2. मराठों के साथ संघर्ष और हुडा सम्मेलन
दुर्जनसाल का शासनकाल बाहरी चुनौतियों से भरा था:
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हुडा सम्मेलन (1734 ई.): मराठों के बढ़ते हस्तक्षेप को रोकने के लिए राजस्थान के राजाओं ने भीलवाड़ा के ‘हुडा’ नामक स्थान पर एक सम्मेलन किया। महाराव दुर्जनसाल ने इस सम्मेलन में कोटा का प्रतिनिधित्व किया और मराठों के विरुद्ध एकजुट होने की शपथ ली।
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कोटा की घेराबंदी: जब कोटा ने मराठों को चौथ (टैक्स) देने से मना किया, तो मराठों ने कोटा की घेराबंदी की। दुर्जनसाल ने वीरता और कूटनीति से राज्य की रक्षा की, हालांकि अंततः उन्हें संधि करनी पड़ी।
3. बूंदी के उत्तराधिकार युद्ध में भूमिका
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दुर्जनसाल ने बूंदी के राव राजा बुद्धसिंह का समर्थन किया, जिन्हें जयपुर के सवाई जयसिंह ने गद्दी से हटा दिया था।
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उन्होंने मेवाड़ के साथ मिलकर जयपुर के प्रभुत्व को चुनौती दी, जिससे कोटा और जयपुर के संबंधों में तनाव आ गया।
4. निर्माण और धार्मिक कार्य (Construction & Religion)
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मुकुंदरा की सुरक्षा: उन्होंने मुकुंदरा दर्रे (Pass) पर मजबूत चौकियाँ बनवाईं ताकि दक्षिण से आने वाले मराठा आक्रमणकारियों को रोका जा सके।
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धार्मिक आस्था: अपने पिता भीमसिंह की तरह ये भी कृष्ण भक्त थे। उन्होंने मंदिरों के रखरखाव और धार्मिक उत्सवों (विशेषकर दशहरा) को राजकीय संरक्षण दिया।
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कोटा का दशहरा: कहा जाता है कि कोटा के विश्व प्रसिद्ध दशहरा मेले को व्यवस्थित और भव्य रूप देने की शुरुआत इन्हीं के समय से प्रभावी हुई थी।
5. राजदरबार, लेखक और कला
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कोटा चित्रकला: इनके काल में चित्रकला की ‘कोटा शैली’ और अधिक परिपक्व हुई। शिकार के दृश्यों के अलावा दरबारी वैभव और धार्मिक जुलूसों के चित्र अधिक बनने लगे।
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लेखक और कवि: उनके दरबार में ब्रज और डिंगल भाषा के कवियों को प्रश्रय मिला। उनके वीरतापूर्ण कार्यों पर कई समकालीन कवियों ने रचनाएँ कीं।
6. ऐतिहासिक स्रोत (Sources)
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वंश भास्कर: सूर्यमल मिश्रण ने दुर्जनसाल के शासनकाल, उनके मराठों से संघर्ष और जयपुर के साथ उनके तनावपूर्ण संबंधों का विस्तृत वर्णन किया है।
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कोटा राज्य की ख्यात: इसमें उनके प्रशासनिक सुधारों और मराठों को दिए गए ‘चौथ’ के लेन-देन का विवरण मिलता है।
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गौरीशंकर हीराचंद ओझा: ओझा जी ने दुर्जनसाल को एक “धैर्यवान और चतुर शासक” बताया है जिसने गिरती हुई मुगल सत्ता और बढ़ते मराठा प्रभाव के बीच कोटा को बचाए रखा।
महाराव दुर्जनसाल – मुख्य तथ्य (Table)
| श्रेणी | विवरण |
| पिता | महाराव भीमसिंह |
| समकालीन | सवाई जयसिंह (जयपुर), बाजीराव प्रथम (मराठा पेशवा) |
| प्रमुख घटना | हुडा सम्मेलन (1734) में भागीदारी। |
| विरासत | मराठा युग में कोटा की स्वतंत्रता और मान-मर्यादा की रक्षा। |
निष्कर्ष:
महाराव दुर्जनसाल ने एक ऐसे दौर में शासन किया जब राजस्थान की राजनीति बदल रही थी। उन्होंने अपनी सैन्य शक्ति से अधिक अपनी कूटनीतिक सूझबूझ का परिचय दिया। उनकी मृत्यु के बाद कोटा की राजनीति में झाला जालिम सिंह जैसे शक्तिशाली मंत्रियों का उदय हुआ।