राव राजा अनिरुद्ध सिंह (शासनकाल: 1681–1695 ई.) बूंदी के हाड़ा राजवंश के 14वें शासक थे। वे राव भावसिंह के पौत्र थे (उनके पिता का नाम किशन सिंह था, जिनकी मृत्यु भावसिंह के जीवनकाल में ही हो गई थी)। अनिरुद्ध सिंह का शासनकाल मुग़ल सम्राट औरंगज़ेब के समय के सबसे चुनौतीपूर्ण और साहसिक अभियानों के लिए जाना जाता है।
यहाँ राव अनिरुद्ध सिंह के बारे में विस्तृत विवरण दिया गया है:
1. सैन्य अभियान और औरंगज़ेब की सेवा
अनिरुद्ध सिंह औरंगज़ेब के अत्यंत भरोसेमंद और साहसी सेनापतियों में से एक थे:
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उत्तर-पश्चिमी सीमांत अभियान: औरंगज़ेब ने उन्हें अफ़गानिस्तान की सीमा पर विद्रोहों को दबाने के लिए भेजा। उन्होंने खैबर दर्रे और काबुल के क्षेत्रों में अदम्य वीरता का परिचय दिया।
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दक्कन (दक्षिण) अभियान: उन्होंने मुग़ल सेना के साथ दक्षिण भारत के युद्धों में भी भाग लिया। उनकी घुड़सवार सेना ‘हाड़ा वाहिनी’ अपनी गति और मारक क्षमता के लिए प्रसिद्ध थी।
2. ऐतिहासिक स्मारक: 84 खंभों की छतरी
अनिरुद्ध सिंह के शासनकाल की सबसे प्रसिद्ध पहचान ’84 खंभों की छतरी’ है:
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निर्माण: इसका निर्माण 1683 ई. (कुछ स्रोतों के अनुसार 1695 ई.) में राव अनिरुद्ध सिंह ने करवाया था।
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उद्देश्य: यह छतरी उनके धाभाई (धाय भाई) देवा की स्मृति में बनवाई गई थी, जिनसे अनिरुद्ध सिंह का गहरा लगाव था।
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वास्तुकला: यह दो मंजिला भव्य स्मारक है जो 84 नक्काशीदार खंभों पर टिका है। इसके खंभों पर कामसूत्र के आसनों, पशु-पक्षियों और पौराणिक कथाओं का सूक्ष्म अंकन किया गया है।
3. पारिवारिक संबंध और उत्तराधिकार
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रानी नाथावती: इनकी रानी नाथावती ने बूंदी में सुप्रसिद्ध ‘रानीजी की बावड़ी’ का निर्माण 1699 ई. में करवाया था (अनिरुद्ध सिंह की मृत्यु के बाद), जिसे ‘बावलियों का सिरमौर’ कहा जाता है।
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पुत्र: इनके दो प्रमुख पुत्र थे—बुद्धसिंह और जोधसिंह। बुद्धसिंह इनके उत्तराधिकारी बने, जिनके समय में बूंदी की राजनीति में बड़ा बदलाव आया।
4. दरबार और साहित्य (Court & Literature)
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संरक्षण: अनिरुद्ध सिंह के दरबार में कवियों और चारणों को प्रोत्साहन मिलता था। उनके काल में हाड़ा राजाओं की वंशावली और उनकी विजय गाथाओं को व्यवस्थित रूप से लिखने की परंपरा जारी रही।
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सांस्कृतिक प्रभाव: काबुल और दक्षिण में रहने के कारण उनके समय में बूंदी की वेशभूषा और खान-पान पर बाहरी संस्कृतियों का थोड़ा प्रभाव पड़ा, जिसे बूंदी की स्थानीय संस्कृति में बहुत खूबसूरती से ढाल लिया गया।
5. ऐतिहासिक स्रोत (Sources)
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वंश भास्कर: सूर्यमल मिश्रण ने अनिरुद्ध सिंह को एक “शक्तिशाली और स्वामिभक्त” राजा के रूप में वर्णित किया है, जिन्होंने मुग़ल साम्राज्य की सुरक्षा के लिए सात समुद्र पार (अफ़गानिस्तान की सीमाओं) तक युद्ध किए।
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स्थानीय शिलालेख: 84 खंभों की छतरी पर उत्कीर्ण लेख उनके समय की घटनाओं और देवा के प्रति उनके सम्मान की पुष्टि करते हैं।
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मुग़ल दस्तावेज: औरंगज़ेब के आधिकारिक रिकॉर्ड्स में अनिरुद्ध सिंह को ‘राव’ की उपाधि के साथ एक उच्च श्रेणी का मनसबदार बताया गया है।
राव अनिरुद्ध सिंह – मुख्य तथ्य (Table)
| श्रेणी | विवरण |
| पिता | कुंवर किशन सिंह (दादा: राव भावसिंह)। |
| समकालीन मुग़ल | औरंगज़ेब। |
| प्रसिद्ध निर्माण | 84 खंभों की छतरी। |
| रानी का योगदान | रानीजी की बावड़ी (रानी नाथावती द्वारा)। |
| मुख्य युद्ध क्षेत्र | काबुल, कंधार और दक्कन। |
निष्कर्ष:
राव अनिरुद्ध सिंह एक ऐसे शासक थे जिन्होंने बूंदी की तलवार की चमक को भारत की सीमाओं (अफ़गानिस्तान) तक पहुँचाया। उनके द्वारा निर्मित 84 खंभों की छतरी आज भी बूंदी के पर्यटन का मुख्य केंद्र है और उनकी कलात्मक रुचि का प्रमाण है।