महाराणा जगत सिंह II

महाराणा जगत सिंह II (शासनकाल: 1734–1751 ई.) मेवाड़ के उन शासकों में से हैं जिनका शासनकाल मराठा शक्ति के उदय और राजपूत एकता के प्रयासों के लिए जाना जाता है। उनके काल की सबसे प्रमुख घटना ‘हुरड़ा सम्मेलन’ थी। वे अपने पिता संग्राम सिंह II की मृत्यु के बाद गद्दी पर बैठे थे।

यहाँ महाराणा जगत सिंह II के बारे में हर बारीक जानकारी दी गई है:


1. उत्पत्ति और पारिवारिक पृष्ठभूमि (Origin & Family)

  • वंश: सिसोदिया राजवंश।

  • माता-पिता: पिता महाराणा संग्राम सिंह II

  • राज्याभिषेक: 1734 ई. में मेवाड़ के महाराणा बने।

  • विवाद: उनके शासनकाल के दौरान आमेर (जयपुर) के उत्तराधिकार युद्ध में उनकी सक्रिय भूमिका रही, क्योंकि उनकी बुआ चन्द्रकुंवरी का विवाह सवाई जयसिंह से हुआ था और देबारी समझौते के अनुसार उनका पुत्र ही उत्तराधिकारी होना था।

2. हुरड़ा सम्मेलन (Hurda Conference) – 17 जुलाई 1734

यह उनके जीवन की सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक घटना थी:

  • उद्देश्य: राजस्थान में बढ़ते मराठा हस्तक्षेप को रोकने के लिए सभी राजपूत राजाओं को एक मंच पर लाना।

  • अध्यक्षता: इस सम्मेलन की अध्यक्षता महाराणा जगत सिंह II ने की थी।

  • सहभागी: सवाई जयसिंह (आमेर), अभयसिंह (मारवाड़), दुर्जनसाल (कोटा) आदि।

  • परिणाम: सम्मेलन में ‘अहदनामा’ (इकरारनामा) तैयार हुआ कि सभी राजा एक-दूसरे के शत्रु को अपना शत्रु मानेंगे, लेकिन आपसी अविश्वास के कारण यह योजना विफल रही।


3. स्थापत्य: जगनिवास महल (Architecture)

जगत सिंह II को उनकी विलासिता और कलात्मक रुचि के लिए जाना जाता है:

  • जगनिवास महल (Lake Palace): पिछोला झील के बीचों-बीच स्थित यह भव्य महल इन्हीं की देन है। आज इसे दुनिया के सबसे शानदार होटलों में से एक ‘ताज लेक पैलेस’ के रूप में जाना जाता है।

  • जगमंदिर का विस्तार: उन्होंने अपने पूर्वज जगत सिंह I द्वारा बनाए गए जगमंदिर महल में भी कुछ सुधार और सजावट करवाई।

  • उदयपुर की सुंदरता: उन्होंने महलों के भीतर झरोखों और कांच के काम (Mirror work) को बढ़ावा दिया।


4. राजदरबार, कवि और लेखक (Court & Intellectuals)

उनके दरबार में साहित्य और इतिहास का लेखन जारी रहा:

  • नेकीराम: इनके दरबार के प्रमुख विद्वान और कवि थे जिन्होंने ‘जगत विलास’ (Jagat Vilas) नामक ग्रंथ की रचना की। इस ग्रंथ में जगत सिंह II के शासनकाल और मेवाड़ की तत्कालीन स्थिति का विस्तृत वर्णन है।

  • कला संरक्षण: इनके काल में चित्रकला की ‘मेवाड़ शैली’ में मुगल प्रभाव और भी कम हुआ और स्थानीय लोक-कला के तत्व उभरे। इनके समय के चित्रों में नाच-गाने और दरबारी मनोरंजन के दृश्यों की अधिकता है।


5. मराठा आक्रमण और आर्थिक संकट

जगत सिंह II का शासनकाल मेवाड़ के लिए आर्थिक रूप से कठिन था:

  • मराठों का चौथ (Tax): हुरड़ा सम्मेलन की विफलता के बाद मराठों (विशेषकर पेशवा बाजीराव और बाद में होल्कर-सिंधिया) ने मेवाड़ से भारी चौथ वसूलना शुरू कर दिया।

  • आंतरिक कलह: जयपुर के उत्तराधिकार युद्ध (ईश्वरी सिंह बनाम माधो सिंह) में हस्तक्षेप करने के कारण मेवाड़ को काफी धन और जनहानि उठानी पड़ी।

6. सूक्ष्म बारीकियाँ (The Minute Details)

  • सवाई जयसिंह से संबंध: सवाई जयसिंह इनके फुफा थे, लेकिन आमेर की राजनीति के कारण दोनों के बीच कई बार तनाव की स्थिति बनी।

  • विदेशी मेहमान: कहा जाता है कि जगत सिंह II यूरोपीय वस्तुओं और सजावट के शौकीन थे।

  • प्रशासनिक गिरावट: उनके समय में सामंतों की आपसी खींचतान बढ़ गई थी, जिससे केंद्रीय सत्ता कमजोर होने लगी थी।

  • मृत्यु (1751 ई.): लगभग 17 वर्ष के शासन के बाद 1751 ई. में उनका देहांत हुआ।


महाराणा जगत सिंह II: एक नज़र में (Table)

श्रेणी विवरण
शासन काल 1734 – 1551 ई.।
मुख्य निर्माण जगनिवास महल (लेक पैलेस), उदयपुर।
ऐतिहासिक घटना हुरड़ा सम्मेलन की अध्यक्षता (1734)।
दरबारी ग्रंथ जगत विलास (लेखक: नेकीराम)।
चुनौती मराठों का बढ़ता प्रभाव और भारी खिराज (Tax)।
विशेषता कला और विलासिता के प्रेमी।

निष्कर्ष:

महाराणा जगत सिंह II एक ऐसे मोड़ पर शासक बने जब मेवाड़ बाहरी शक्तियों (मराठों) के दबाव में आने लगा था। हालांकि उन्होंने राजपूतों को एकजुट करने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। ‘लेक पैलेस’ के रूप में उनकी विरासत आज भी उदयपुर की पहचान बनी हुई है।

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