गागरोन का युद्ध (1519 ईस्वी)

गागरोन का युद्ध (1519 ईस्वी) महाराणा सांगा के सैन्य करियर की सबसे शानदार जीत में से एक मानी जाती है। इस युद्ध ने मालवा (मध्य प्रदेश) के सुल्तान की शक्ति को पूरी तरह कुचल दिया और सांगा को उत्तर भारत का निर्विवाद नेता बना दिया।

युद्ध का मुख्य विवरण

विवरण जानकारी
समय 1519 ईस्वी
स्थान गागरोन दुर्ग के पास (झालावाड़, राजस्थान)
मुख्य पक्ष महाराणा सांगा (मेवाड़) ⚔️ महमूद खिलजी II (मालवा का सुल्तान)
परिणाम महाराणा सांगा की प्रचंड विजय

युद्ध के मुख्य कारण

  1. मेदिनी राय का मुद्दा: मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी II और उसके हिंदू प्रधानमंत्री मेदिनी राय के बीच अनबन हो गई थी। मेदिनी राय भागकर महाराणा सांगा की शरण में आ गए। सांगा ने उन्हें गागरोन और चंदेरी की जागीर दे दी, जिससे सुल्तान नाराज हो गया।

  2. साम्राज्यवादी प्रतिद्वंद्विता: मालवा और मेवाड़ के बीच सदियों से वर्चस्व की लड़ाई चल रही थी। सुल्तान महमूद ने गागरोन को वापस जीतने के लिए हमला किया।


युद्ध का घटनाक्रम और सांगा की वीरता

  • घेराबंदी और हमला: जब महमूद खिलजी II ने गागरोन के किले को घेरा, तब महाराणा सांगा अपनी सेना लेकर वहाँ पहुँचे।

  • भीषण वर्षा और युद्ध: कहा जाता है कि युद्ध के दौरान भारी वर्षा हो रही थी। सांगा ने अपनी सेना के साथ सुल्तान की सेना पर अचानक और इतना तेज हमला किया कि मालवा की सेना को संभलने का मौका ही नहीं मिला।

  • सुल्तान का बंदी बनना: इस युद्ध में महमूद खिलजी II बुरी तरह घायल हो गया। महाराणा सांगा ने न केवल युद्ध जीता, बल्कि सुल्तान को बंदी बनाकर चित्तौड़ ले आए।


सांगा की महानता और परिणाम

  • उदारता का परिचय: सुल्तान महमूद खिलजी II को 6 महीने तक चित्तौड़ में बंदी रखने के बाद, महाराणा सांगा ने उसे उसका आधा राज्य वापस लौटा दिया और रिहा कर दिया। सांगा ने सुल्तान के एक पुत्र को जमानत के तौर पर अपने पास रखा था।

  • रणथंभौर का अधिकार: इस जीत के बदले सांगा को सुल्तान से रत्नजड़ित मुकुट और कमरबंद मिले, साथ ही रणथंभौर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर मेवाड़ का पूर्ण नियंत्रण हो गया।

  • सर्वोच्च शक्ति: इस युद्ध के बाद महाराणा सांगा का प्रभाव इतना बढ़ गया कि गुजरात और मालवा के सुल्तान उनसे खौफ खाने लगे।


विशेष नोट: गागरोन का किला भारत के उन दुर्लभ ‘जल दुर्गों’ (Water Forts) में से एक है, जो बिना किसी नींव के एक विशाल चट्टान पर बना हुआ है और तीन तरफ से आहू और कालीसिंध नदियों से घिरा है।

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