महाराव रामसिंह (शासनकाल: 1821–1889 ई.) बूंदी के हाड़ा राजवंश के सबसे प्रभावशाली, दूरदर्शी और विद्वान शासक माने जाते हैं। उनका 68 वर्षों का लंबा शासनकाल बूंदी के इतिहास में ‘सांस्कृतिक पुनर्जागरण’ और ‘आधुनिकता’ का संगम था। उन्हें एक ‘ऋषि राजा’ (Saintly King) के रूप में भी याद किया जाता है।
यहाँ महाराव रामसिंह हाड़ा के बारे में विस्तृत विवरण दिया गया है:
1. साहित्यिक पुनरुत्थान और सूर्यमल मिश्रण
महाराव रामसिंह का सबसे बड़ा योगदान साहित्य के क्षेत्र में है। वे स्वयं विद्वान थे और कवियों के महान आश्रयदाता थे:
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महाकवि सूर्यमल मिश्रण: राजस्थान के राज्य कवि सूर्यमल मिश्रण इन्हीं के दरबारी कवि थे।
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वंश भास्कर: महाराव रामसिंह के आदेश पर ही सूर्यमल मिश्रण ने ऐतिहासिक ग्रंथ ‘वंश भास्कर’ की रचना शुरू की, जो चौहान वंश का सबसे विशाल और प्रमाणिक पिंगल काव्य ग्रंथ है।
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वीर सतसई: 1857 की क्रांति के समय वीरता का संचार करने वाले इस ग्रंथ की रचना भी इन्हीं के काल में हुई।
2. 1857 की क्रांति और कूटनीति
1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान महाराव रामसिंह की भूमिका काफी चर्चित रही:
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अंग्रेजों के प्रति उदासीनता: अन्य राजपूत राजाओं के विपरीत, रामसिंह अंग्रेजों के प्रति बहुत अधिक सहयोगी नहीं थे। उन्होंने विद्रोहियों (क्रांतिकारियों) के प्रति सहानुभूति रखी और अंग्रेजों की पूर्ण सहायता करने से बचते रहे।
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ब्रिटिश नाराजगी: उनकी इस नीति के कारण अंग्रेज उनसे नाराज हो गए और उनकी तोपों की सलामी (Salute Status) घटा दी गई थी।
3. समाज सुधार और आधुनिकता
महाराव रामसिंह एक सुधारवादी शासक थे जिन्होंने रूढ़िवादिता को तोड़ने का प्रयास किया:
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कुप्रथाओं पर रोक: उन्होंने अपने राज्य में सती प्रथा, कन्या वध और दास प्रथा पर कानूनी रूप से रोक लगाने के प्रभावी प्रयास किए।
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शिक्षा का प्रसार: उन्होंने बूंदी में आधुनिक शिक्षा के लिए स्कूल खुलवाए और संस्कृत पाठशालाओं को पुनर्जीवित किया।
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न्याय व्यवस्था: उन्होंने राज्य की न्यायिक प्रणाली को व्यवस्थित किया ताकि आम जनता को सुलभ न्याय मिल सके।
4. निर्माण और धार्मिक कार्य
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राम निवास बाग: उन्होंने बूंदी में सुंदर उद्यानों और विश्राम गृहों का निर्माण करवाया।
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धार्मिक नियम: वे अत्यंत अनुशासित और धार्मिक थे। उन्होंने राज्य के मंदिरों के प्रबंधन के लिए नियम बनाए और स्वयं भी एक संयमित जीवन व्यतीत किया।
5. ऐतिहासिक स्रोत (Sources)
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वंश भास्कर: इस ग्रंथ में रामसिंह के शासनकाल, उनके व्यक्तित्व और उनकी नीतियों का सबसे गहरा विवरण मिलता है।
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वीर विनोद: कविराज श्यामलदास ने भी रामसिंह की विद्वत्ता और उनके दृढ़ चरित्र की प्रशंसा की है।
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ब्रिटिश रिकॉर्ड्स: राजपूताना एजेंसी के दस्तावेजों में उन्हें एक ‘कठिन और स्वाभिमानी’ शासक बताया गया है जो आसानी से ब्रिटिश दबाव में नहीं आते थे।
महाराव रामसिंह – मुख्य तथ्य (Table)
| श्रेणी | विवरण |
| शासन काल | 1821–1889 ई. (बूंदी का सबसे लंबा शासन)। |
| दरबारी कवि | महाकवि सूर्यमल मिश्रण। |
| प्रमुख ग्रंथ | वंश भास्कर, वीर सतसई (इनके संरक्षण में रचित)। |
| 1857 की भूमिका | क्रांतिकारियों के प्रति सहानुभूति और अंग्रेजों के प्रति असहयोग। |
| उपनाम | ‘ऋषि राजा’ या ‘आधुनिक बूंदी के निर्माता’। |
निष्कर्ष:
महाराव रामसिंह हाड़ा राजस्थान के उन विरले शासकों में से थे जिन्होंने अंग्रेजों के काल में भी अपनी सांस्कृतिक जड़ों और स्वाभिमान को सुरक्षित रखा। उनके संरक्षण में रचित साहित्य आज भी राजस्थान की ऐतिहासिक धरोहर की रीढ़ है।