राव मुकुंदसिंह (शासनकाल: 1648–1658 ई.) कोटा के दूसरे शासक और राव माधोसिंह के ज्येष्ठ पुत्र थे। इतिहास में उन्हें उनकी वीरता, प्रेम कहानी और मुगलों के उत्तराधिकार युद्ध में उनके सर्वोच्च बलिदान के लिए जाना जाता है।
यहाँ राव मुकुंदसिंह का विस्तृत विवरण दिया गया है:
1. वीरता और धर्मत का युद्ध (1658 ई.)
मुकुंदसिंह के जीवन की सबसे गौरवशाली और दुखद घटना धर्मत का युद्ध है।
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संदर्भ: मुगल सम्राट शाहजहाँ के बीमार पड़ने पर उसके बेटों (दारा शिकोह और औरंगजेब) के बीच उत्तराधिकार का युद्ध शुरू हुआ।
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बलिदान: मुकुंदसिंह ने दारा शिकोह (शाही सेना) का साथ दिया। 15 अप्रैल 1658 को उज्जैन के पास धर्मत नामक स्थान पर हुए युद्ध में वे औरंगजेब की सेना के विरुद्ध लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए।
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अनोखा उदाहरण: इस युद्ध में मुकुंदसिंह के साथ उनके चार और भाई (मोहनसिंह, जूझारसिंह, कन्हैयाराम और किशोरसिंह) भी लड़ते हुए शहीद हुए। एक ही परिवार के पाँच भाइयों का एक साथ बलिदान भारतीय इतिहास में दुर्लभ है।
2. प्रेम और निर्माण: अबली मीणी का महल
राव मुकुंदसिंह को उनकी प्रेमिका अबली मीणी के प्रति उनके अगाध प्रेम के लिए भी याद किया जाता है।
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अबली मीणी का महल: उन्होंने कोटा में चम्बल नदी के किनारे मुकुंदरा की पहाड़ियों में अपनी सुंदर प्रेमिका अबली मीणी के लिए एक छोटा लेकिन भव्य महल बनवाया।
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राजस्थान का छोटा ताजमहल: इस महल को इसकी सुंदरता और प्रेम गाथा के कारण ‘राजस्थान का दूसरा ताजमहल’ या ‘हाड़ौती का ताजमहल’ भी कहा जाता है।
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मुकुंदरा हिल्स: उन्होंने इस पहाड़ी क्षेत्र का नाम अपने नाम पर ‘मुकुंदरा’ रखा, जिसे आज ‘मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व’ के रूप में जाना जाता है।
3. राजदरबार और साहित्य (Court & Literature)
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विद्वानों का सम्मान: मुकुंदसिंह स्वयं एक कलाप्रेमी शासक थे। उनके दरबार में ब्रज भाषा के कवियों को विशेष स्थान प्राप्त था।
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हाड़ा शौर्य का वर्णन: उनके और उनके भाइयों के धर्मत के युद्ध में बलिदान को लेकर समकालीन कवियों ने कई ‘रासो’ और वीर रस की कविताएँ लिखीं।
4. ऐतिहासिक स्रोत (Sources)
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वंश भास्कर: महाकवि सूर्यमल मिश्रण ने धर्मत के युद्ध में हाड़ा भाइयों के पराक्रम का बहुत ही मार्मिक और विस्तृत वर्णन किया है।
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मुंतखब-उल-लुबाब (खाफी खाँ): इस मुगलकालीन स्रोत में धर्मत के युद्ध के दौरान राजपूत सेनापति मुकुंदसिंह की बहादुरी का उल्लेख है।
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गौरीशंकर हीराचंद ओझा: अपनी पुस्तक ‘कोटा राज्य का इतिहास’ में ओझा जी ने मुकुंदसिंह को एक ‘निष्ठवान योद्धा’ की संज्ञा दी है।
राव मुकुंदसिंह – मुख्य तथ्य (Table)
| श्रेणी | विवरण |
| पिता | राव माधोसिंह |
| प्रसिद्ध निर्माण | अबली मीणी का महल (मुकुंदरा हिल्स) |
| ऐतिहासिक युद्ध | धर्मत का युद्ध (1658 ई.) |
| विरासत | ‘हाड़ौती के ताजमहल’ के प्रेरक और मुगल सत्ता के रक्षक। |
निष्कर्ष:
राव मुकुंदसिंह का व्यक्तित्व प्रेम और शौर्य का अद्भुत संगम था। जहाँ एक ओर उन्होंने अबली मीणी के लिए महल बनवाकर कला को अमर किया, वहीं दूसरी ओर धर्मत के मैदान में अपने भाइयों सहित प्राणों की आहुति देकर हाड़ा चौहानों के ‘स्वामी-भक्ति’ के सिद्धांत को चरितार्थ किया।
क्या आप इनके बाद के शासक महाराव भीमसिंह (जिन्होंने कोटा को ‘नंदग्राम’ बनाया) के बारे में जानना चाहेंगे?