राव अनहिल (जिन्हें अणहिल भी कहा जाता है) नाडोल के चौहान वंश के 5वें शासक थे। वे अहिल चौहान के उत्तराधिकारी और महेन्द्र चौहान के पुत्र थे। इनका शासनकाल 11वीं शताब्दी के मध्य (लगभग 1030–1055 ई.) माना जाता है।
अहिल की कोई संतान न होने के कारण सत्ता अनहिल के हाथों में आई। उन्होंने न केवल अपने भाई की विरासत को संभाला, बल्कि नाडोल को उस समय की एक बड़ी राजनीतिक शक्ति बना दिया।
यहाँ राव अनहिल के बारे में विस्तृत विवरण दिया गया है:
1. सैन्य अभियान और महत्वपूर्ण युद्ध (Wars & Conquests)
अनहिल एक अत्यंत महत्वाकांक्षी और पराक्रमी योद्धा थे। उन्होंने कई दिशाओं में युद्ध लड़े:
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शाकम्भरी के चौहानों से संघर्ष: हालांकि नाडोल शाखा सांभर से ही निकली थी, लेकिन अनहिल ने अपनी स्वतंत्र सत्ता को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए सांभर के चौहानों के साथ भी संघर्ष किया।
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मालवा के परमारों पर विजय: अनहिल ने मालवा के शक्तिशाली परमार शासक भोज की सेना को पराजित किया था। यह उनकी सबसे बड़ी सैन्य उपलब्धियों में से एक मानी जाती है।
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गुजरात (चालुक्य) और चित्तौड़ पर आक्रमण: उन्होंने गुजरात के चालुक्यों के विरुद्ध अपने भाई अहिल की नीति को जारी रखा। शिलालेखों के अनुसार, उन्होंने शाकम्भरी, गुजरात और चित्तौड़ की सेनाओं को चुनौती दी थी।
2. ‘सप्तशती’ का विस्तार (Expansion of Territory)
अनहिल ने नाडोल राज्य की सीमाओं का अभूतपूर्व विस्तार किया:
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उन्होंने आसपास के 700 गाँवों (जिसे ‘सप्तशती’ कहा जाता था) पर अपना पूर्ण नियंत्रण स्थापित किया।
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उन्होंने मंडोर और आसपास के क्षेत्रों के कई किलों को जीतकर अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया।
3. निर्माण और धार्मिक कार्य (Construction & Religion)
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दुर्ग की मजबूती: अनहिल ने नाडोल के किले की प्राचीरों को और अधिक मजबूत करवाया ताकि बाहरी आक्रमणों (विशेषकर तुर्क और चालुक्यों) से रक्षा की जा सके।
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धार्मिक दान: उनके समय के शिलालेखों में उनके द्वारा मंदिरों और ब्राह्मणों को दिए गए भूमि अनुदानों का विस्तृत उल्लेख मिलता है। वे आशापुरा माता के अनन्य भक्त थे।
4. ऐतिहासिक स्रोत (Sources)
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नाडोल के शिलालेख: अनहिल का नाम नाडोल की वंशावली में बहुत गौरव के साथ लिया जाता है। शिलालेखों में उन्हें “शत्रुओं का विनाश करने वाला” और “वीरता का प्रतीक” कहा गया है।
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मुँहणोत नैणसी री ख्यात: नैणसी ने अनहिल को एक बहुत ही प्रतापी और विस्तारवादी राजा के रूप में वर्णित किया है।
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सुन्धा पर्वत अभिलेख: इस अभिलेख में भी अनहिल द्वारा जीते गए प्रदेशों और उनकी वीरता का वर्णन मिलता है।
राव अनहिल – मुख्य तथ्य (Table)
| श्रेणी | विवरण |
| क्रम | नाडोल के 5वें चौहान शासक। |
| प्रमुख प्रतिद्वंद्वी | मालवा के राजा भोज (परमार) और गुजरात के चालुक्य। |
| विरासत | ‘सप्तशती’ (700 गाँवों) पर मजबूत शासन। |
| विशेषता | एक साथ कई पड़ोसी शक्तियों (चित्तौड़, गुजरात, मालवा) से लोहा लिया। |
निष्कर्ष:
राव अनहिल ने नाडोल को मारवाड़ की एक ऐसी शक्ति बना दिया जिसे नजरअंदाज करना तत्कालीन बड़े साम्राज्यों (जैसे चालुक्य और परमार) के लिए नामुमकिन था। उनके बाद उनके पुत्र बालप्रसाद गद्दी पर बैठे।