गोविंदराज चौहान

गोविंदराज चौहान का इतिहास राजस्थान के एक नए अध्याय की शुरुआत है। जहाँ पृथ्वीराज तृतीय के साथ अजमेर का अध्याय समाप्त हुआ, वहीं गोविंदराज ने रणथंभौर के रूप में चौहानों को एक नया ठिकाना दिया।

यहाँ गोविंदराज चौहान के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है:

1. पारिवारिक पृष्ठभूमि (Family Background)

  • पिता: महान सम्राट पृथ्वीराज चौहान तृतीय

  • माता: इतिहास के अनुसार वे पृथ्वीराज की रानी के पुत्र थे (कुछ मतों में संयोगिता का उल्लेख मिलता है, लेकिन ऐतिहासिक रूप से वे पृथ्वीराज के ज्येष्ठ पुत्र थे)।

  • दादा: सोमेश्वर चौहान।

  • पुत्र: वल्हणदेव (जिन्होंने उनके बाद रणथंभौर की गद्दी संभाली)।

2. अजमेर का संघर्ष और निष्कासन (Conflict in Ajmer)

  • 1192 ई. में तराइन के द्वितीय युद्ध के बाद मोहम्मद गौरी ने गोविंदराज को अपनी अधीनता में अजमेर का शासक नियुक्त किया था।

  • काका का विद्रोह: पृथ्वीराज के भाई (गोविंदराज के चाचा) हरिराज चौहान को यह अधीनता स्वीकार नहीं थी। हरिराज ने गोविंदराज को अजमेर से निकाल दिया और स्वयं अजमेर पर अधिकार कर लिया।

  • रणथंभौर प्रस्थान: अजमेर से निकलने के बाद, गोविंदराज ने कुतुबुद्दीन ऐबक की सहायता ली और 1194 ई. में रणथंभौर में अपना नया राज्य स्थापित किया।

3. रणथंभौर शाखा की स्थापना (Foundation of Ranthambore)

  • गोविंदराज को ‘रणथंभौर के चौहानों का आदिपुरुष/संस्थापक’ कहा जाता है।

  • उन्होंने अपनी राजधानी रणथंभौर के अभेद्य दुर्ग को बनाया। शुरुआत में वे दिल्ली सल्तनत (कुतुबुद्दीन ऐबक) के प्रति वफादार रहे और उन्हें कर (tax) भेजते थे ताकि अपना नया राज्य सुरक्षित रख सकें।

4. युद्ध और सैन्य नीति (Wars & Strategy)

  • अजमेर का घेरा: उन्होंने ऐबक के साथ मिलकर अपने चाचा हरिराज के विरुद्ध अभियान चलाया था।

  • रक्षात्मक नीति: उनका प्रारंभिक समय युद्धों से अधिक ‘राज्य को बचाने’ में बीता। उन्होंने रणथंभौर दुर्ग की घेराबंदी को मजबूत किया ताकि भविष्य में तुर्क आक्रमणों को झेला जा सके।

5. राजदरबार और विद्वान (Court & Literature)

गोविंदराज के समय के लिखित साक्ष्य कम हैं, लेकिन उनके बारे में जानकारी निम्नलिखित ग्रंथों से मिलती है:

  • पृथ्वीराज विजय (जयानक): इसमें उनके वंश और शुरुआती जीवन का संकेत मिलता है।

  • हम्मीर महाकाव्य (नयनचंद्र सूरी): इसमें रणथंभौर वंश की वंशावली गोविंदराज से ही शुरू की गई है।

  • उनके दरबार में उन विद्वानों को आश्रय मिला जो अजमेर के पतन के बाद तितर-बितर हो गए थे।

6. निर्माण कार्य (Construction)

  • दुर्ग का सुदृढ़ीकरण: उन्होंने रणथंभौर दुर्ग के भीतर कुछ सैन्य आवासों और सुरक्षा प्राचीरों का निर्माण करवाया।

  • सांस्कृतिक प्रभाव: उन्होंने अजमेर की सांस्कृतिक परंपराओं को रणथंभौर में जीवित रखा।

7. महत्वपूर्ण छोटी बातें (Key Facts)

  • अधीनता: वे दिल्ली सल्तनत के साथ संधि करने वाले पहले प्रमुख चौहान राजा बने, जिसे उस समय के कुछ राजपूतों ने पसंद नहीं किया, लेकिन इसी कूटनीति के कारण चौहान वंश का अस्तित्व बचा रहा।

  • जैन धर्म का प्रभाव: उनके समय में भी रणथंभौर क्षेत्र में जैन मंदिरों और विद्वानों को सम्मान मिलता रहा।

  • वंश की निरंतरता: यदि गोविंदराज ने रणथंभौर की स्थापना न की होती, तो हम्मीर देव जैसे महान योद्धा का इतिहास संभवतः नहीं होता।

गोविंदराज एक ऐसे शासक थे जिन्होंने ‘विनाश के बीच सृजन’ किया। जब सब कुछ खत्म हो रहा था, तब उन्होंने चौहानों के गौरव को रणथंभौर की पहाड़ियों में सुरक्षित कर दिया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *