सांभर और अजमेर के चौहानों (चाहमानों) का इतिहास राजपूताना के गौरवशाली अध्यायों में से एक है। यहाँ इस वंश के मूल परिचय से संबंधित मुख्य बिंदु दिए गए हैं:
1. उत्पत्ति और स्थापना
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मूल स्थान: चौहानों का आदि-स्थान सपादलक्ष (सवा लाख गाँवों का क्षेत्र) माना जाता है, जिसकी राजधानी अहिच्छत्रपुर (वर्तमान नागौर) थी।
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संस्थापक: वासुदेव चौहान ने 551 ई. के आसपास इस वंश की नींव रखी।
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सांभर झील: बिजोलिया शिलालेख के अनुसार, सांभर झील का निर्माण वासुदेव चौहान ने ही करवाया था।
2. प्रमुख शासक और विस्तार
चौहानों ने धीरे-धीरे अपनी शक्ति बढ़ाई और सांभर से अजमेर तक विस्तार किया:
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अजयराज चौहान (1113 ई.): इन्होंने अजयमेरु (अजमेर) नगर बसाया और उसे अपनी राजधानी बनाया। इन्होंने ‘अजयप्रिय द्रम्म’ नाम के चाँदी के सिक्के भी चलाए।
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अर्णोराज (आनाजी): अजमेर में आनासागर झील का निर्माण करवाया और पुष्कर में वराह मंदिर बनवाया।
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विग्रहराज चतुर्थ (बीसलदेव): इन्हें ‘कवि बांधव’ भी कहा जाता है। इन्होंने ‘हरिकेली’ नाटक की रचना की और अजमेर में एक संस्कृत पाठशाला बनवाई (जिसे बाद में कुतुबुद्दीन ऐबक ने अढ़ाई दिन के झोंपड़े में बदल दिया)। इनके काल को चौहानों का स्वर्ण युग माना जाता है।
3. पृथ्वीराज चौहान तृतीय (1177–1192 ई.)
इस वंश के सबसे प्रतापी शासक, जिन्हें ‘राय पिथौरा’ के नाम से भी जाना जाता है:
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उन्होंने दिल्ली के शासक अनंगपाल तोमर से दिल्ली का कार्यभार संभाला।
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तराइन का प्रथम युद्ध (1191): मोहम्मद गौरी को बुरी तरह पराजित किया।
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तराइन का द्वितीय युद्ध (1192): इस युद्ध में पराजय के साथ ही भारत में मुस्लिम शासन की नींव पड़ी और अजमेर के चौहान साम्राज्य का पतन शुरू हुआ।
4. महत्वपूर्ण ऐतिहासिक संधियाँ और संबंध
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मुगल/ब्रिटिश काल: 1803 में अंग्रेजों के साथ संधियों के दौर में भी इस क्षेत्र की सामंतशाही और ऐतिहासिक विरासत का विशेष महत्व रहा।
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सांस्कृतिक प्रभाव: चौहानों ने न केवल युद्धों में बल्कि स्थापत्य कला और साहित्य में भी राजस्थान को समृद्ध किया।
प्रमुख स्रोत
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पृथ्वीराज रासो: चंद्रबरदाई द्वारा रचित।
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बिजोलिया शिलालेख (1170 ई.): चौहानों को ‘वत्सगोत्रीय ब्राह्मण’ बताया गया है।
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हम्मीर महाकाव्य: नयनचंद्र सूरी द्वारा रचित।
यह वंश अपनी वीरता और स्वाभिमान के लिए आज भी राजस्थान के जन-मानस में रचा-बसा है।
चौहान वंश (सांभर एवं अजमेर) – शासक वंशावली
| क्रम | राजा का नाम | शासन काल (अनुमानित/निश्चित) | मुख्य उपलब्धि / विशेष विवरण |
| 1 | वासुदेव चौहान | 551 ई. | संस्थापक; सपादलक्ष (सांभर) में राज्य की नींव रखी। |
| 2 | गुवक प्रथम | 809 – 836 ई. | प्रतिहारों के सामंत थे; सीकर में हर्षनाथ मंदिर का निर्माण शुरू करवाया। |
| 3 | चंदनराज | 9वीं शताब्दी | इनकी रानी ‘रुद्राणी’ (आत्मप्रभा) पुष्कर में 1000 दीपक जलाती थी। |
| 4 | विग्रहराज द्वितीय | 971 – 998 ई. | भड़ौच (गुजरात) में आशापुरा माता का मंदिर बनवाया। |
| 5 | अजयराज चौहान | 1105 – 1133 ई. | 1113 ई. में अजमेर बसाया; राजधानी सांभर से अजमेर बदली। |
| 6 | अर्णोराज (आनाजी) | 1133 – 1155 ई. | अजमेर में आनासागर झील और पुष्कर में वराह मंदिर बनवाया। |
| 7 | विग्रहराज चतुर्थ | 1153 – 1163 ई. | ‘बीसलदेव’; दिल्ली जीतने वाला प्रथम चौहान; हरिकेली नाटक के रचयिता। |
| 8 | सोमेश्वर चौहान | 1169 – 1177 ई. | पृथ्वीराज तृतीय के पिता; इनके समय की मूर्तियाँ प्रसिद्ध हैं। |
| 9 | पृथ्वीराज तृतीय | 1177 – 1192 ई. | अंतिम महान शासक; तराइन के युद्ध (1191, 1192) के नायक। |