राव शिवभाण

राव शिवभाण, सिरोही के देवड़ा चौहान वंश के एक अत्यंत महत्वपूर्ण शासक थे। वे राव रायमल के पुत्र थे। उनके शासनकाल को सिरोही के इतिहास में एक बड़े ‘प्रशासनिक परिवर्तन’ के रूप में देखा जाता है, क्योंकि उन्होंने ही चौहानों की सत्ता को चंद्रावती से हटाकर नए क्षेत्र में स्थापित करने की नींव रखी थी।

उनका शासनकाल लगभग 1404 ई. से 1424 ई. तक रहा।

1. शिवपुरी (पुरानी सिरोही) की स्थापना (1405 ई.)

राव शिवभाण की सबसे बड़ी उपलब्धि शिवपुरी नगर की स्थापना है:

  • कारण: प्राचीन राजधानी चंद्रावती मैदानी इलाके में होने के कारण मुस्लिम आक्रमणकारियों (विशेषकर गुजरात के सुल्तानों) के निशाने पर रहती थी। सुरक्षा की दृष्टि से शिवभाण ने पहाड़ियों के बीच एक नया स्थान चुना।

  • स्थापना: 1405 ई. (विक्रम संवत 1462) में उन्होंने ‘सिरनवा’ की पहाड़ियों के पास शिवपुरी नामक नगर बसाया। इसे आज ‘पुरानी सिरोही’ के नाम से जाना जाता है।

2. सारणेश्वर महादेव का जुड़ाव

  • शिवपुरी के पास ही प्रसिद्ध सारणेश्वर महादेव का मंदिर स्थित है, जो देवड़ा चौहानों के कुलदेवता हैं।

  • शिवभाण ने इस क्षेत्र को अपनी गतिविधियों का केंद्र बनाकर राज्य को एक धार्मिक और सामरिक मजबूती प्रदान की।

3. सैन्य और राजनीतिक परिस्थितियाँ

  • गुजरात से संघर्ष: उनके समय में गुजरात सल्तनत की शक्ति बढ़ रही थी। शिवभाण ने पहाड़ियों की दुर्गम भौगोलिक स्थिति का लाभ उठाकर सुल्तानों के सीधे प्रभाव से अपने राज्य को बचाए रखा।

  • मारवाड़ से संबंध: उनके शासनकाल में मारवाड़ (जोधपुर) के राठौड़ों के साथ भी सीमा विस्तार को लेकर छिटपुट संघर्ष शुरू हुए।

4. उत्तराधिकार और विरासत

  • राव शिवभाण के बाद उनके पराक्रमी पुत्र राव सहसमल गद्दी पर बैठे।

  • शिवभाण ने जो नगर (शिवपुरी) बसाया था, वह बाद में आबादी बढ़ने और सुरक्षा कारणों से पर्याप्त नहीं रहा, जिसके बाद उनके पुत्र सहसमल ने 1425 ई. में वर्तमान सिरोही नगर की स्थापना की।

5. ऐतिहासिक स्रोत (Sources)

  • मुहणोत नैणसी री ख्यात: इसमें शिवभाण द्वारा शिवपुरी बसाने और उनके वंशक्रम का विस्तृत उल्लेख है।

  • सारणेश्वर शिलालेख: इस क्षेत्र के आसपास मिले शिलालेखों में उनके द्वारा किए गए निर्माण कार्यों और धार्मिक दान की पुष्टि होती है।


राव शिवभाण – मुख्य तथ्य

श्रेणी विवरण
भूमिका शिवपुरी (पुरानी सिरोही) के संस्थापक।
राजधानी परिवर्तन चंद्रावती से शिवपुरी (1405 ई.)।
वंशज राव सहसमल (पुत्र) जिन्होंने वर्तमान सिरोही बसाया।
योगदान चौहानों को सुरक्षित पहाड़ी आश्रय प्रदान करना।

निष्कर्ष:

राव शिवभाण एक दूरदर्शी शासक थे जिन्होंने समय की माँग को समझते हुए असुरक्षित राजधानी चंद्रावती का मोह त्यागा और पहाड़ियों की गोद में एक नया सुरक्षित ठिकाना खोजा। उनके इसी निर्णय ने सिरोही रियासत को आने वाले सदियों तक बाहरी आक्रमणों से बचाए रखने में मदद की।

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