राव सहसमल

राव सहसमल, सिरोही के देवड़ा चौहान वंश के सबसे महत्वपूर्ण शासकों में से एक थे। वे राव शिवभाण के पुत्र थे। राजस्थान के इतिहास में उनका नाम मुख्य रूप से वर्तमान सिरोही नगर की स्थापना और मेवाड़ के महाराणा कुम्भा के साथ उनके संघर्षों के लिए जाना जाता है।

राव सहसमल के बारे में विस्तृत विवरण यहाँ दिया गया है:

1. सिरोही नगर की स्थापना (1425 ई.)

सहसमल की सबसे बड़ी उपलब्धि वर्तमान सिरोही शहर को बसाना है:

  • स्थापना तिथि: उन्होंने वैशाख शुक्ल द्वितीया, विक्रम संवत 1482 (1425 ईस्वी) में सिरोही नगर की नींव रखी।

  • कारण: उनके पिता द्वारा बसाई गई ‘शिवपुरी’ सुरक्षा और विस्तार की दृष्टि से कम पड़ रही थी। सहसमल ने एक ऊँचे और अधिक सुरक्षित स्थान पर नया शहर बसाने का निर्णय लिया।

  • किले का निर्माण: उन्होंने सिरोही में एक मजबूत दुर्ग का निर्माण करवाया, जिसे आज भी देखा जा सकता है।


2. मेवाड़ (महाराणा कुम्भा) के साथ संघर्ष

सहसमल का शासनकाल मेवाड़ के महान शासक महाराणा कुम्भा के समकालीन था। इन दोनों के बीच तीव्र संघर्ष हुआ:

  • कारण: सहसमल ने मेवाड़ के कुछ सीमावर्ती क्षेत्रों पर अधिकार कर लिया था। साथ ही, आबू का सामरिक महत्व कुम्भा के लिए बहुत अधिक था।

  • परिणाम: महाराणा कुम्भा ने अपने सेनापति डोडिया नरसिंह को सिरोही पर आक्रमण के लिए भेजा। सहसमल इस युद्ध में पराजित हुए और उन्हें मेवाड़ की अधीनता स्वीकार करनी पड़ी।

  • अचलगढ़ पर अधिकार: इस संघर्ष के बाद ही महाराणा कुम्भा ने आबू में अचलगढ़ दुर्ग का पुनर्निर्माण करवाया और वहाँ अपनी सैन्य चौकियाँ स्थापित कीं।


3. सैन्य और प्रशासनिक उपलब्धियाँ

  • राज्य का विस्तार: मेवाड़ से संघर्ष के बावजूद, सहसमल ने अपने पड़ोसी राज्यों और स्थानीय कबीलों को नियंत्रित रखा।

  • राजपूतों को संगठित करना: उन्होंने देवड़ा चौहानों की शक्ति को बिखराव से बचाया और उन्हें एक झंडे के नीचे संगठित किया।

4. धार्मिक और सांस्कृतिक कार्य

  • मंदिरों को संरक्षण: उन्होंने सिरोही और आसपास के क्षेत्रों के मंदिरों के लिए भूमि और धन दान किया।

  • चारण-भाटों को आश्रय: उनके दरबार में विद्वानों और कवियों का सम्मान होता था। उनके काल की घटनाओं का वर्णन ‘सिरोही राज्य की ख्यातों’ में विस्तार से मिलता है।

5. ऐतिहासिक स्रोत (Sources)

  • महाराणा कुम्भा के अभिलेख: कुम्भा के प्रशस्ति पत्रों (जैसे कुंभलगढ़ शिलालेख) में सहसमल पर विजय का उल्लेख मिलता है।

  • मुहणोत नैणसी री ख्यात: नैणसी ने सहसमल को सिरोही का एक प्रतापी निर्माता बताया है।

  • सिरोही का इतिहास (गौरीशंकर हीराचंद ओझा): ओझा जी ने सहसमल के शासनकाल की तिथियों और घटनाओं का सटीक विश्लेषण किया है।


राव सहसमल – मुख्य तथ्य (Table)

श्रेणी विवरण
भूमिका वर्तमान सिरोही नगर के संस्थापक
शासन काल लगभग 1424 – 1451 ई.
राजधानी सिरोही (1425 ई. से स्थायी)।
प्रमुख प्रतिद्वंदी मेवाड़ के महाराणा कुम्भा।
विशेषता चौहानों को एक आधुनिक और सुरक्षित राजधानी प्रदान की।

निष्कर्ष:

राव सहसमल को आज भी सिरोही के ‘निर्माता’ के रूप में पूजा जाता है। यद्यपि उन्हें कुम्भा जैसी महाशक्ति के सामने झुकना पड़ा, लेकिन उन्होंने जिस सिरोही नगर की स्थापना की, वह आगे चलकर सदियों तक देवड़ा चौहानों की आन-बान और शान का केंद्र बना रहा।

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