राव लाखा (शासनकाल: 1451–1483 ई.) सिरोही के देवड़ा चौहान वंश के एक अत्यंत प्रभावशाली और चतुर शासक थे। वे राव सहसमल के पुत्र थे। उनका शासनकाल न केवल युद्धों के लिए, बल्कि कूटनीति, धार्मिक कार्यों और सिरोही की प्रतिष्ठा को पुनः स्थापित करने के लिए जाना जाता है।
राव लाखा के बारे में विस्तृत विवरण यहाँ दिया गया है:
1. मेवाड़ से संबंधों में सुधार
सहसमल के समय में मेवाड़ और सिरोही के संबंधों में काफी कड़वाहट आ गई थी और आबू पर मेवाड़ का अधिकार हो गया था।
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रणमल राठौड़ का प्रभाव: जब मेवाड़ में रणमल राठौड़ का प्रभाव बढ़ा, तो लाखा ने परिस्थितियों का लाभ उठाकर अपनी स्थिति मजबूत की।
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स्वतंत्रता की पुनः प्राप्ति: लाखा ने धीरे-धीरे उन क्षेत्रों पर अपना नियंत्रण वापस स्थापित करना शुरू किया जो उनके पिता के समय मेवाड़ के अधीन चले गए थे।
2. धार्मिक योगदान: द्वारकाधीश मूर्ति की स्थापना
राव लाखा के शासनकाल की सबसे प्रसिद्ध घटना धार्मिक महत्व की है:
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मूर्ति लाना: लोककथाओं और ऐतिहासिक स्रोतों के अनुसार, राव लाखा पावागढ़ (गुजरात) से भगवान द्वारकाधीश की प्राचीन और चमत्कारी मूर्ति लेकर आए थे।
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स्थापना: उन्होंने इस मूर्ति को सिरोही में पूरे राजकीय सम्मान के साथ स्थापित करवाया। आज भी यह मंदिर सिरोही के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है।
3. निर्माण और कला
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मंदिरों का निर्माण: उन्होंने सिरोही में कई भव्य मंदिरों और जलाशयों का निर्माण करवाया। उनके समय में स्थापत्य कला को काफी बढ़ावा मिला।
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नगर का विकास: अपने पिता द्वारा बसाए गए सिरोही नगर को उन्होंने और अधिक व्यवस्थित और सुंदर बनाया।
4. सैन्य अभियान और कूटनीति
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गुजरात सल्तनत से संघर्ष: सिरोही की भौगोलिक स्थिति ऐसी थी कि वह गुजरात और दिल्ली के बीच पड़ती थी। लाखा ने गुजरात के सुल्तानों के आक्रमणों का डटकर मुकाबला किया।
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मारवाड़ से संबंध: मारवाड़ के राठौड़ों के साथ भी उनके सीमा विवाद चलते रहे, लेकिन उन्होंने अपनी सैन्य कुशलता से सिरोही की सीमाओं को सुरक्षित रखा।
5. ऐतिहासिक स्रोत (Sources)
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मुहणोत नैणसी री ख्यात: नैणसी ने लाखा को एक धर्मनिष्ठ और चतुर शासक बताया है।
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स्थानीय शिलालेख: सिरोही के मंदिरों में लगे शिलालेखों में उनके द्वारा किए गए दान और मूर्ति स्थापना का विवरण मिलता है।
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गौरीशंकर हीराचंद ओझा: ओझा जी ने लाखा को सिरोही के ‘सांस्कृतिक पुनर्जागरण’ का श्रेय दिया है।
राव लाखा – मुख्य तथ्य (Table)
| श्रेणी | विवरण |
| पिता | राव सहसमल |
| मुख्य उपलब्धि | द्वारकाधीश मूर्ति की स्थापना और राज्य का पुनर्गठन। |
| विशेषता | मेवाड़ और गुजरात के बीच सफल कूटनीति। |
| धार्मिक झुकाव | वैष्णव धर्म के प्रति विशेष अनुराग। |
निष्कर्ष:
राव लाखा ने अपने पिता द्वारा खोई हुई सिरोही की प्रतिष्ठा को वापस पाया। जहाँ सहसमल को एक ‘निर्माता’ के रूप में देखा जाता है, वहीं लाखा को एक ऐसे शासक के रूप में याद किया जाता है जिसने सिरोही को धार्मिक और कूटनीतिक रूप से समृद्ध बनाया।
उनके बाद उनके पुत्र राव जगमाल गद्दी पर बैठे। क्या आप जगमाल या सिरोही के सबसे प्रसिद्ध योद्धा राव सुरताण (दत्ताणी का युद्ध) के बारे में जानना चाहेंगे?