गिंगोली का युद्ध (13 मार्च 1807) राजस्थान के इतिहास की एक अत्यंत दुखद घटना से जुड़ा है, जिसे ‘कृष्णा कुमारी विवाद’ के नाम से जाना जाता है। यह युद्ध साम्राज्य विस्तार के लिए नहीं, बल्कि एक राजकुमारी से विवाह के अधिकार को लेकर दो बड़ी रियासतों (जयपुर और जोधपुर) के बीच लड़ा गया था।
युद्ध का मुख्य विवरण
| विवरण | जानकारी |
| समय | 13 मार्च 1807 ईस्वी |
| स्थान | गिंगोली (परबतसर के पास, नागौर जिला) |
| मुख्य पक्ष | जगत सिंह II (जयपुर) ⚔️ मान सिंह (जोधपुर) |
| मुख्य कारण | मेवाड़ की राजकुमारी कृष्णा कुमारी से विवाह का विवाद |
| परिणाम | जयपुर (जगत सिंह II) की विजय |
युद्ध की पृष्ठभूमि: कृष्णा कुमारी विवाद
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सगाई का टूटना: मेवाड़ के महाराणा भीम सिंह की पुत्री कृष्णा कुमारी की सगाई पहले जोधपुर के राजा भीम सिंह से हुई थी। लेकिन विवाह से पहले ही भीम सिंह की मृत्यु हो गई।
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नया प्रस्ताव: इसके बाद कृष्णा कुमारी की सगाई जयपुर के राजा जगत सिंह II से कर दी गई।
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मान सिंह का विरोध: जोधपुर के नए राजा मान सिंह ने इसका विरोध किया। उनका तर्क था कि कृष्णा कुमारी की सगाई जोधपुर घराने में हुई थी, इसलिए उसका विवाह जोधपुर के नए राजा (स्वयं मान सिंह) से ही होना चाहिए।
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तनाव: इस बात को मान सिंह ने अपने सम्मान की लड़ाई बना लिया और जयपुर जाने वाले विवाह के प्रस्ताव को रोकने के लिए सेना भेज दी।
युद्ध का घटनाक्रम और कूटनीति
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विशाल गठबंधन: जयपुर के राजा जगत सिंह II ने मान सिंह को हराने के लिए एक बड़ा गठबंधन बनाया, जिसमें बीकानेर के राजा सूरत सिंह और पिंडारी नेता अमीर खान पिंडारी भी शामिल थे।
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गिंगोली का मैदान: नागौर के पास गिंगोली में दोनों सेनाएं भिड़ीं। इस युद्ध में जोधपुर की सेना को करारी हार का सामना करना पड़ा।
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जोधपुर की घेराबंदी: जीत के बाद जगत सिंह की सेना ने जोधपुर के मेहरानगढ़ किले को घेर लिया, लेकिन वे उसे जीत नहीं पाए।
एक दुखद अंत: राजकुमारी का बलिदान
युद्ध के बाद भी स्थिति नहीं सुधरी। पिंडारी अमीर खान ने अपनी निष्ठा बदली और दोनों राज्यों को लूटना शुरू कर दिया। उसने महाराणा भीम सिंह पर दबाव बनाया कि इस गृहयुद्ध को रोकने का एक ही रास्ता है: राजकुमारी की मृत्यु।
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21 जुलाई 1810 को मेवाड़ की मर्यादा और राजस्थान में शांति स्थापित करने के लिए राजकुमारी कृष्णा कुमारी को जहर दे दिया गया। मात्र 16 वर्ष की आयु में उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए, जिससे यह विवाद हमेशा के लिए खत्म हो गया।
ऐतिहासिक महत्व
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इस युद्ध और विवाद ने राजस्थान की बड़ी रियासतों (मेवाड़, जयपुर, जोधपुर) को आर्थिक और सैन्य रूप से पूरी तरह कमजोर कर दिया।
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इसी कमजोरी का फायदा उठाकर 1817-18 में राजस्थान के राजाओं ने अंग्रेजों (East India Company) के साथ संधियाँ करना शुरू कर दिया।