1857 की क्रांति के दौरान मारवाड़ (जोधपुर) क्षेत्र में हुए बिथोड़ा और चेलावास के युद्ध क्रांतिकारियों की वीरता के सबसे बड़े प्रतीक हैं। इन युद्धों का नेतृत्व आउवा के ठाकुर कुशाल सिंह चंपावत ने किया था।
1. बिथोड़ा का युद्ध (8 सितम्बर 1857)
यह युद्ध क्रांतिकारियों और जोधपुर की राजकीय सेना के बीच हुआ था।
| विवरण | जानकारी |
| स्थान | बिथोड़ा (पाली जिला) |
| पक्ष 1 | ठाकुर कुशाल सिंह (क्रांतिकारी और एरिनपुरा के सैनिक) |
| पक्ष 2 | जोधपुर राजकीय सेना (किलेदार ओनाड़ सिंह) + अंग्रेज (कैप्टन हीथकोट) |
| परिणाम | क्रांतिकारियों की शानदार जीत |
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मुख्य घटना: जोधपुर का किलेदार ओनाड़ सिंह इस युद्ध में मारा गया। अंग्रेजों और जोधपुर की सेना को मैदान छोड़कर भागना पड़ा। इस जीत से क्रांतिकारियों का मनोबल बहुत बढ़ गया।
2. चेलावास का युद्ध (18 सितम्बर 1857)
इसे “काले-गोरे का युद्ध” भी कहा जाता है क्योंकि इसमें एक तरफ भारतीय क्रांतिकारी (काले) थे और दूसरी तरफ अंग्रेज (गोरे)।
| विवरण | जानकारी |
| स्थान | चेलावास (पाली जिला) |
| पक्ष 1 | ठाकुर कुशाल सिंह और उनके क्रांतिकारी सैनिक |
| पक्ष 2 | ए.जी.जी. जॉर्ज लॉरेंस और पॉलिटिकल एजेंट मैक मेसन |
| परिणाम | अंग्रेजों की शर्मनाक हार |
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ऐतिहासिक घटना: इस युद्ध में जोधपुर के पॉलिटिकल एजेंट मैक मेसन का सिर काटकर आउवा के किले के दरवाजे पर लटका दिया गया था।
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ए.जी.जी. की हार: राजस्थान के तत्कालीन ए.जी.जी. (Agent to the Governor General) जॉर्ज लॉरेंस को अपनी जान बचाकर अजमेर भागना पड़ा।
युद्ध के बाद की स्थिति और आउवा का पतन (जनवरी 1858)
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बदला: दो हारों से बौखलाए अंग्रेजों ने कर्नल होम्स के नेतृत्व में एक विशाल सेना आउवा भेजी।
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20 जनवरी 1858: अंग्रेजों ने आउवा के किले को घेर लिया। अंततः ठाकुर कुशाल सिंह को किला छोड़कर मेवाड़ की ओर जाना पड़ा (उन्होंने कोठारिया के रावत जोध सिंह के यहाँ शरण ली)।
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सुगाली माता की मूर्ति: अंग्रेज आउवा की आराध्य देवी सुगाली माता (10 सिर और 54 हाथ वाली मूर्ति) को उठाकर अजमेर ले गए, क्योंकि उन्हें डर था कि यह मूर्ति क्रांतिकारियों में जोश भरती है।
निष्कर्ष
आउवा के ये युद्ध सिद्ध करते हैं कि 1857 की क्रांति में राजस्थान के सामंतों और आम जनता ने अंग्रेजों को कितनी कड़ी चुनौती दी थी। लोकगीतों में आज भी गाया जाता है:
“ढोल बाज्यो, चंग बाज्यो, भलो बाज्यो बांकियो… एजेंट ने मार कर दरवाजे पर टांकियो!”