अजयराज चौहान (शासनकाल: 1105–1133 ई.) चौहान वंश के एक अत्यंत दूरदर्शी और शक्तिशाली शासक थे। उन्हें चौहानों के ‘साम्राज्य निर्माण’ के युग का प्रवर्तक माना जाता है। उनके समय में चौहानों की शक्ति सांभर के छोटे से क्षेत्र से निकलकर राजस्थान के केंद्र तक पहुँच गई।
अजयराज चौहान से जुड़े महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्य निम्नलिखित हैं:
1. अजमेर नगर की स्थापना (1113 ई.)
अजयराज की सबसे बड़ी देन अजयमेरु (अजमेर) नगर की स्थापना है।
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उन्होंने 1113 ई. में बीठली पहाड़ी पर ‘अजयमेरु दुर्ग’ (जिसे अब तारागढ़ कहा जाता है) का निर्माण करवाया।
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उन्होंने सुरक्षा और रणनीतिक कारणों से अपनी राजधानी सांभर से बदलकर अजमेर स्थानांतरित कर दी।
2. सैन्य विजय और सुरक्षा
अजयराज एक महान सेनानायक थे। उन्होंने अपने राज्य को बाहरी आक्रमणों से सुरक्षित रखने के लिए कई युद्ध लड़े:
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मालवा विजय: उन्होंने मालवा के परमार शासक नरवर्मन को पराजित किया और उनके सेनापति ‘सुलहण’ को बंदी बना लिया।
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तुर्क आक्रमण विफल: उन्होंने गजनी के शासकों द्वारा किए गए तुर्क आक्रमणों को सफलतापूर्वक विफल कर दिया, जिससे राजस्थान की सीमाओं को सुरक्षा मिली।
3. मुद्रा व्यवस्था (Currency)
अजयराज ने आर्थिक रूप से भी राज्य को मजबूत किया:
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उन्होंने चाँदी और तांबे के सिक्के चलाए जिन्हें ‘अजयप्रिय द्रम्म’ कहा जाता था।
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रानी सोमलेखा (सोमलदेवी): अजयराज की रानी सोमलेखा का नाम भी इन सिक्कों पर अंकित था। यह उस काल में महिला सशक्तिकरण और राजसी सम्मान का एक अनूठा उदाहरण है।
4. धार्मिक सहिष्णुता
अजयराज स्वयं शैव मतानुयायी (भगवान शिव के भक्त) थे, लेकिन वे अन्य धर्मों के प्रति अत्यंत उदार थे:
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उन्होंने अजमेर में जैन धर्म के अनुयायियों को मंदिर बनाने की अनुमति दी।
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पार्श्वनाथ मंदिर के लिए उन्होंने एक ‘स्वर्ण कलश’ भेंट किया था।
5. संन्यास और उत्तराधिकार
अपने शासनकाल के अंतिम समय में, अजयराज ने राजपाट अपने पुत्र अर्णोराज (आनाजी) को सौंप दिया और स्वयं तपस्या करने के लिए पुष्कर के जंगलों में चले गए।
अजयराज चौहान का महत्व (Summary Table)
| क्षेत्र | विवरण |
| राजधानी परिवर्तन | सांभर से अजमेर (1113 ई.) |
| प्रमुख दुर्ग | गढ़ बीठली (तारागढ़, अजमेर) |
| सिक्के | श्री अजयदेव / सोमलदेवी अंकित ‘द्रम्म’ |
| उपाधि | उन्हें चौहान साम्राज्य का ‘वास्तविक संस्थापक’ (विस्तार की दृष्टि से) माना जाता है। |