अर्णोराज (आनाजी)

अर्णोराज चौहान, जिन्हें जनमानस में ‘आनाजी’ के नाम से जाना जाता है, अजयराज चौहान के पुत्र और उत्तराधिकारी थे। उनका शासनकाल लगभग 1133 ई. से 1155 ई. तक रहा। उन्होंने अजमेर को सांस्कृतिक और धार्मिक रूप से समृद्ध करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

अर्णोराज से जुड़ी प्रमुख उपलब्धियां और ऐतिहासिक तथ्य निम्नलिखित हैं:

1. आनासागर झील का निर्माण (1137 ई.)

अर्णोराज की सबसे प्रसिद्ध उपलब्धि अजमेर में आनासागर झील का निर्माण है।

  • ऐतिहासिक कारण: ऐसा माना जाता है कि अजमेर पर तुर्कों (गजनवी) ने आक्रमण किया था। अर्णोराज ने उन्हें बुरी तरह पराजित किया। युद्ध के बाद रक्त से सनी धरती को साफ करने के लिए उन्होंने ‘चंद्रा’ नदी के जल को रोककर इस झील का निर्माण करवाया।

2. सैन्य विजय और संघर्ष

अर्णोराज का शासनकाल निरंतर युद्धों और कूटनीति का काल रहा:

  • मालवा विजय: उन्होंने मालवा के शासकों को पराजित कर अपने राज्य की सीमाएं सुरक्षित कीं।

  • चालुक्य-चौहान संघर्ष: गुजरात के चालुक्य राजा जयसिंह सिद्धराज के साथ उनका युद्ध हुआ, लेकिन बाद में संधि हो गई और जयसिंह ने अपनी पुत्री ‘कांचन देवी’ का विवाह अर्णोराज से कर दिया।

  • कुमारपाल से पराजय: बाद में गुजरात के ही अगले शासक कुमारपाल ने आबू के निकट युद्ध में अर्णोराज को पराजित किया था।

3. धार्मिक योगदान

  • वराह मंदिर (पुष्कर): अर्णोराज ने पुष्कर में भगवान विष्णु के वराह मंदिर का निर्माण करवाया। यह मंदिर आज भी स्थापत्य कला का सुंदर उदाहरण है।

  • वे स्वयं शैव मत के अनुयायी थे, लेकिन उन्होंने अजमेर में जैन धर्म के अनुयायियों के लिए भी खरतरगच्छ के अनुयायियों को भूमि दान दी थी।

4. पारिवारिक संबंध और अंत

  • पुत्र: उनके प्रमुख पुत्रों में जगदेव, विग्रहराज चतुर्थ (बीसलदेव) और सोमेश्वर (पृथ्वीराज तृतीय के पिता) शामिल थे।

  • दुखद अंत: अर्णोराज की हत्या उनके ही ज्येष्ठ पुत्र जगदेव ने कर दी थी। इसी कारण जगदेव को चौहान वंश का ‘पितृहन्ता’ (पिता की हत्या करने वाला) कहा जाता है।


अर्णोराज (आनाजी) – एक नजर में

श्रेणी विवरण
पिता अजयराज चौहान
प्रसिद्ध निर्माण आनासागर झील, वराह मंदिर (पुष्कर)
समकालीन प्रतिद्वंदी जयसिंह सिद्धराज, कुमारपाल (गुजरात के चालुक्य)
साहित्यिक साक्ष्य ‘पृथ्वीराज विजय’ (जयानक द्वारा रचित)

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