सम्राट पृथ्वीराज चौहान तृतीय (शासनकाल: 1177–1192 ई.), जिन्हें ‘राय पिथौरा’ के नाम से भी जाना जाता है, चौहान वंश के सबसे महान और भारत के अंतिम हिंदू सम्राट माने जाते हैं। उन्होंने मात्र 11 वर्ष की आयु में सिंहासन संभाला और अपनी वीरता से भारतीय इतिहास में अमर हो गए।
यहाँ उनके जीवन और शासनकाल का विस्तृत विवरण दिया गया है:
1. प्रारंभिक जीवन और राज्याभिषेक
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जन्म: 1166 ई. (अनहिलपाटन, गुजरात)।
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पिता: सोमेश्वर चौहान।
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माता: कर्पूरी देवी (जो उनकी प्रारंभिक संरक्षिका भी रहीं)।
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उपाधियाँ: ‘राय पिथौरा’ (युद्ध में पीठ न दिखाने वाला) और ‘दल पंगुल’ (विश्व विजेता)।
2. प्रमुख सैन्य विजय (Expansion)
पृथ्वीराज ने ‘दिग्विजय’ की नीति अपनाई और अपने चारों ओर के शत्रुओं का दमन किया:
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भण्डानकों का दमन (1182 ई.): गुड़गांव और हिसार क्षेत्र की इस उपद्रवी जाति को पूरी तरह समाप्त किया।
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महोबा का युद्ध (तुमुन का युद्ध – 1182 ई.): चंदेल शासक परमर्दिदेव को पराजित किया। इसी युद्ध में प्रसिद्ध वीर सेनापति आल्हा और ऊदल वीरगति को प्राप्त हुए थे।
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नागार्जुन का दमन: अपने चचेरे भाई नागार्जुन के विद्रोह को कुचलकर आंतरिक स्थिति मजबूत की।
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चालुक्य संघर्ष: गुजरात के भीमदेव द्वितीय को पराजित कर अपने पिता की मृत्यु का बदला लिया।
3. तराइन के ऐतिहासिक युद्ध (The Battles of Tarain)
मोहम्मद गौरी और पृथ्वीराज के बीच हुए ये युद्ध भारतीय इतिहास के निर्णायक मोड़ थे:
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तराइन का प्रथम युद्ध (1191 ई.): पृथ्वीराज ने मोहम्मद गौरी को बुरी तरह पराजित किया। गौरी घायल होकर भाग गया।
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तराइन का द्वितीय युद्ध (1192 ई.): गौरी अधिक तैयारी के साथ लौटा। छल-कपट और राजपूतों की सैन्य थकावट के कारण पृथ्वीराज की पराजय हुई। इसके बाद भारत में तुर्क शासन की नींव पड़ी।
4. प्रेम और शौर्य: संयोगिता अपहरण
कन्नौज के राजा जयचंद गहड़वाल की पुत्री संयोगिता और पृथ्वीराज की प्रेम कहानी इतिहास प्रसिद्ध है। जयचंद द्वारा आयोजित स्वयंवर से पृथ्वीराज ने संयोगिता का उनकी इच्छा से अपहरण किया, जिसके कारण कन्नौज और अजमेर के बीच शत्रुता और गहरी हो गई।
5. दरबारी विद्वान और साहित्य
पृथ्वीराज के दरबार में विद्वानों का जमावड़ा रहता था:
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चंद्रबरदाई: इनके परम मित्र और राजकवि, जिन्होंने ‘पृथ्वीराज रासो’ की रचना की।
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जयानक: इन्होंने ‘पृथ्वीराज विजय’ नामक महाकाव्य लिखा।
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अन्य विद्वान: वागीश्वर, जनार्दन, विश्वरूप और पृथ्वीभट्ट।
6. स्थापत्य: किला राय पिथौरा
उन्होंने दिल्ली में ‘किला राय पिथौरा’ का निर्माण करवाया, जिसके अवशेष आज भी महरौली (दिल्ली) में देखे जा सकते हैं। उन्होंने अजमेर को सांस्कृतिक और राजनीतिक शक्ति का केंद्र बनाए रखा।
पृथ्वीराज चौहान तृतीय – एक नजर में
| विशेषता | विवरण |
| सेनापति | खाण्डेराव और चामुण्डराय |
| प्रधान मंत्री | कदम्बवास (कैमास) |
| अंतिम युद्ध | तराइन का द्वितीय युद्ध (1192 ई.) |
| मुख्य स्रोत | पृथ्वीराज रासो, पृथ्वीराज विजय, हम्मीर महाकाव्य |
ऐतिहासिक महत्व:
पृथ्वीराज चौहान की मृत्यु के साथ ही अजमेर के चौहानों का मुख्य शासन समाप्त हो गया। उनके पुत्र गोविंदराज ने बाद में रणथंभौर में चौहानों की नई शाखा स्थापित की। पृथ्वीराज आज भी अदम्य साहस, वीरता और स्वाभिमान के प्रतीक माने जाते हैं।