राव बैरीसाल (शासनकाल: 1697–1705 ई.) सिरोही के देवड़ा चौहान वंश के एक ऐसे शासक थे, जिनका नाम इतिहास में उनकी वीरता से अधिक उनकी शरणागत वत्सलता (शरण आए हुए की रक्षा करना) के लिए स्वर्ण अक्षरों में लिखा गया है।
उनका शासनकाल मुगल सम्राट औरंगजेब के समय का था, जो अपनी कट्टरता के लिए जाना जाता था।
1. मारवाड़ के अजीत सिंह को शरण (सबसे महत्वपूर्ण घटना)
राव बैरीसाल के जीवन की सबसे गौरवशाली घटना मारवाड़ (जोधपुर) के राजकुमार अजीत सिंह को सुरक्षा देना थी।
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परिस्थिति: औरंगजेब जोधपुर के महाराजा जसवंत सिंह की मृत्यु के बाद उनके पुत्र अजीत सिंह को कैद करना या मारना चाहता था। वीर दुर्गादास राठौड़ अजीत सिंह को दिल्ली से बचाकर लाए थे।
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बैरीसाल का साहस: जब कोई अन्य रियासत औरंगजेब के डर से अजीत सिंह को शरण देने को तैयार नहीं थी, तब राव बैरीसाल ने अपनी जान और राज्य की परवाह किए बिना उन्हें सिरोही के कालिंद्री गाँव में छिपाकर रखा।
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पुरोहित जयदेव: उन्होंने अजीत सिंह के पालन-पोषण की जिम्मेदारी पुरोहित जयदेव को सौंपी। यह मुगल साम्राज्य के विरुद्ध एक बहुत बड़ा साहसी कदम था।
2. औरंगजेब से संघर्ष
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राव बैरीसाल ने कभी भी औरंगजेब की दमनकारी नीतियों के सामने घुटने नहीं टेके।
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उन्होंने मारवाड़ के राठौड़ों और मेवाड़ के सिसोदियों के साथ मिलकर मुगलों के खिलाफ एक गुप्त मोर्चा बनाए रखने में मदद की।
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उनकी कूटनीति के कारण ही औरंगजेब की सेना सिरोही की दुर्गम पहाड़ियों में प्रवेश करने से कतराती रही।
3. धार्मिक और सामाजिक कार्य
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कालिंद्री का महत्व: जिस गाँव में अजीत सिंह को रखा गया था, वहाँ उन्होंने धार्मिक संस्थाओं को दान दिया।
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सारणेश्वर महादेव: वे अपने कुलदेवता के प्रति समर्पित थे और उन्होंने मंदिर की सुरक्षा के लिए विशेष सैनिक टुकड़ियाँ तैनात की थीं।
4. ऐतिहासिक स्रोत (Sources)
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वीर विनोद (कविराज श्यामलदास): इस ग्रंथ में बैरीसाल द्वारा अजीत सिंह को शरण देने की घटना का विस्तार से वर्णन है।
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जोधपुर की ख्यात: मारवाड़ के इतिहासकार राव बैरीसाल के इस उपकार को बड़े सम्मान के साथ याद करते हैं।
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मुहणोत नैणसी की परंपरा: यद्यपि नैणसी पहले के थे, लेकिन बाद के इतिहासकारों ने नैणसी की शैली में ही बैरीसाल के ‘शरणागत रक्षक’ धर्म की प्रशंसा की है।
राव बैरीसाल – मुख्य तथ्य (Table)
| श्रेणी | विवरण |
| समकालीन मुगल शासक | औरंगजेब |
| महान कार्य | मारवाड़ के राजकुमार अजीत सिंह को मुगल कैद से बचाकर शरण देना। |
| सहयोगी | वीर दुर्गादास राठौड़। |
| स्वभाव | स्वाभिमानी, रक्षक और निडर। |
निष्कर्ष:
राव बैरीसाल ने राजस्थान की उस महान परंपरा को निभाया जिसमें ‘शरण में आए हुए’ की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया जाता है। उनके इस सहयोग के बिना मारवाड़ का इतिहास शायद कुछ और ही होता।