राव जगमाल (शासनकाल: 1483–1523 ई.) सिरोही के देवड़ा चौहान वंश के एक प्रतापी और वीर शासक थे। वे राव लाखा के पुत्र थे। उनका शासनकाल न केवल सैन्य अभियानों के लिए, बल्कि राजपूताना के अन्य प्रमुख राज्यों (विशेषकर मेवाड़ और मारवाड़) के साथ कूटनीतिक संबंधों के लिए भी प्रसिद्ध है।
यहाँ राव जगमाल के बारे में विस्तृत विवरण दिया गया है:
1. सैन्य पराक्रम और प्रमुख युद्ध
राव जगमाल एक साहसी योद्धा थे। उन्होंने अपने पिता से मिले राज्य की सीमाओं को सुरक्षित रखा:
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बहलोल लोदी से संघर्ष: उनके समय में दिल्ली के सुल्तान बहलोल लोदी की सेनाओं ने राजस्थान की ओर विस्तार का प्रयास किया। जगमाल ने अन्य राजपूत शासकों के साथ मिलकर तुर्कों का प्रतिरोध किया।
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गुजरात से संघर्ष: सिरोही की सीमाएँ गुजरात सल्तनत से लगती थीं। जगमाल ने गुजरात के सुल्तानों के आक्रमणों को सफलतापूर्वक विफल किया।
2. मेवाड़ के साथ संबंध और खानवा का युद्ध
जगमाल के मेवाड़ के साथ संबंध बहुत ही महत्वपूर्ण और उतार-चढ़ाव वाले रहे:
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राणा सांगा के सहयोगी: जब मेवाड़ के महाराणा सांगा ने विदेशी आक्रमणकारी बाबर के विरुद्ध मोर्चा खोला, तो राव जगमाल ने उनका साथ दिया।
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खानवा का युद्ध (1527 ई.): जगमाल ने खानवा के ऐतिहासिक युद्ध में राणा सांगा की सहायता के लिए अपनी सेना भेजी थी। यह उनकी दूरदर्शिता को दर्शाता है कि उन्होंने विदेशी आक्रांता के विरुद्ध एकजुटता दिखाई। (यद्यपि कुछ इतिहासकारों के अनुसार उनका शासन 1523 में समाप्त हो गया था, लेकिन उनकी सेना ने सांगा का साथ जारी रखा)।
3. मारवाड़ (जोधपुर) के साथ वैवाहिक संबंध
जगमाल ने कूटनीतिक मजबूती के लिए मारवाड़ के राठौड़ शासकों के साथ संबंध बनाए:
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उन्होंने मारवाड़ के शासक राव गांगा की बहन से विवाह किया था। हालांकि, बाद में सीमा विवादों के कारण इन संबंधों में तनाव भी आया।
4. धार्मिक और निर्माण कार्य
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जैन धर्म को संरक्षण: सिरोही और आबू क्षेत्र में जैन मंदिरों के विकास में उनका योगदान रहा। उनके समय के कई शिलालेखों में जैन तीर्थों को दिए गए दान का उल्लेख है।
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अचलेश्वर महादेव: वे अपने कुलदेवता सारणेश्वर महादेव और अचलेश्वर महादेव के अनन्य भक्त थे और उन्होंने इन मंदिरों की मर्यादा बनाए रखी।
5. ऐतिहासिक स्रोत (Sources)
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मुहणोत नैणसी री ख्यात: नैणसी ने जगमाल को एक ‘दृढ़ निश्चयी’ राजा बताया है जिसने अपने राज्य की स्वतंत्रता के लिए कभी समझौता नहीं किया।
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खानवा युद्ध के वृत्तांत: मेवाड़ी ख्यातों में सांगा के विश्वसनीय सहयोगियों के रूप में सिरोही के देवड़ा चौहानों (जगमाल) का सम्मानजनक उल्लेख है।
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स्थानीय शिलालेख: सिरोही के आसपास के क्षेत्रों से प्राप्त शिलालेखों में उनके द्वारा किए गए न्याय और शासन व्यवस्था की प्रशंसा की गई है।
राव जगमाल – मुख्य तथ्य (Table)
| श्रेणी | विवरण |
| पिता | राव लाखा |
| समकालीन | महाराणा सांगा (मेवाड़) और बहलोल लोदी (दिल्ली) |
| प्रमुख उपलब्धि | खानवा के युद्ध में राणा सांगा का समर्थन करना। |
| विशेषता | अपनी सैन्य शक्ति से सिरोही को एक स्वतंत्र और शक्तिशाली रियासत बनाए रखा। |
निष्कर्ष:
राव जगमाल ने सिरोही को एक ऐसी क्षेत्रीय शक्ति बना दिया था जिसे मेवाड़ और मारवाड़ जैसे बड़े राज्य भी सम्मान की दृष्टि से देखते थे। उनके बाद के शासकों ने भी इसी वीरता की परंपरा को आगे बढ़ाया।