अलाउद्दीन खिलजी (1296–1316 ई.) दिल्ली सल्तनत के खिलजी वंश का सबसे शक्तिशाली और साम्राज्यवादी सुल्तान था। राजस्थान के इतिहास के संदर्भ में अलाउद्दीन खिलजी का काल ‘विध्वंस और प्रतिरोध’ का काल माना जाता है, क्योंकि उसने राजस्थान की लगभग सभी प्रमुख रियासतों पर आक्रमण किए थे।
उसने ‘सिकंदर-ए-सानी’ (द्वितीय सिकंदर) की उपाधि धारण की थी।
1. राजस्थान पर अलाउद्दीन के प्रमुख आक्रमण
अलाउद्दीन ने राजस्थान के किलों को जीतने के लिए एक-एक करके बड़े अभियान चलाए, जिनके परिणामस्वरूप राजस्थान के प्रसिद्ध ‘साके’ (जौहर + केसरिया) हुए:
A. रणथंभौर का युद्ध (1301 ई.)
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शासक: हम्मीर देव चौहान।
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कारण: हम्मीर ने खिलजी के विद्रोही सेनापति ‘महमूद शाह’ को शरण दी थी।
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परिणाम: हम्मीर देव के सेनापति रणमल और रतिपाल के विश्वासघात के कारण खिलजी की जीत हुई।
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विशेष: यहाँ राजस्थान का प्रथम जौहर (रानी रंगदेवी के नेतृत्व में) हुआ। अमीर खुसरो ने इस जीत पर कहा था— “आज कुफ्र का गढ़ इस्लाम का घर हो गया।”
B. चित्तौड़गढ़ का युद्ध (1303 ई.)
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शासक: रावल रतन सिंह।
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कारण: चित्तौड़ की सामरिक स्थिति और मलिक मोहम्मद जायसी के अनुसार रानी पद्मिनी को पाने की चाह।
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परिणाम: खिलजी की विजय। रानी पद्मिनी ने 1600 महिलाओं के साथ जौहर किया।
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नाम परिवर्तन: अलाउद्दीन ने चित्तौड़ का नाम बदलकर अपने पुत्र के नाम पर ‘खिज्राबाद’ कर दिया था।
C. सिवाऩा का युद्ध (1308 ई.)
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शासक: शीतल देव (सातलदेव) चौहान।
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स्थान: बाड़मेर (मारवाड़ के राजाओं की शरणस्थली)।
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नाम परिवर्तन: जीतने के बाद इसका नाम ‘खैराबाद’ रखा गया।
D. जालौर का युद्ध (1311 ई.)
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शासक: कान्हड़देव चौहान और उनका पुत्र वीरमदेव।
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कारण: कान्हड़देव द्वारा खिलजी की अधीनता स्वीकार न करना।
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परिणाम: दहिया बीका के विश्वासघात के कारण किला फतह हुआ। जालौर का नाम बदलकर ‘जलालाबाद’ कर दिया गया।
2. प्रशासनिक और सैन्य सुधार
अलाउद्दीन केवल एक योद्धा ही नहीं, बल्कि एक सख्त प्रशासक भी था:
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बाजार नियंत्रण (Market Control): उसने वस्तुओं के दाम तय कर दिए थे ताकि कम वेतन में भी सैनिक गुजारा कर सकें।
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घोड़े दागने की प्रथा: सेना में भ्रष्टाचार रोकने के लिए।
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नकद वेतन: सैनिकों को जागीर के बदले नकद वेतन देना शुरू किया।
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चेहरा प्रथा: सैनिकों का हुलिया (Identity) दर्ज करने की शुरुआत।
3. निर्माण कार्य
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अलाई दरवाजा: दिल्ली में कुतुब मीनार के पास।
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सीरी का किला: मंगोल आक्रमणों से बचने के लिए।
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जमात खाना मस्जिद: दिल्ली।
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अलाई मीनार: जो अधूरी रह गई।
4. राजस्थान पर प्रभाव
अलाउद्दीन के आक्रमणों ने राजस्थान की पुरानी सामंती व्यवस्था को हिला दिया, लेकिन इसी काल ने हम्मीर देव चौहान और रावल रतन सिंह जैसे वीरों को जन्म दिया, जो आज भी राजस्थान के शौर्य के प्रतीक हैं। अलाउद्दीन की मृत्यु के बाद, मेवाड़ में महाराणा हम्मीर ने फिर से सिसोदिया वंश की स्थापना कर मुगलों/सल्तनत को चुनौती दी।