रानी पद्मिनी

रानी पद्मिनी (पद्मावत) राजस्थान के इतिहास और लोक-चेतना की एक ऐसी महान विभूति हैं, जिनका नाम स्त्री-सम्मान, अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान (जौहर) का प्रतीक बन गया है। वे मेवाड़ के शासक रावल रतन सिंह की पत्नी थीं।

रानी पद्मिनी के बारे में मुख्य जानकारी दो स्रोतों से मिलती है: ऐतिहासिक साक्ष्य और मलिक मोहम्मद जायसी का महाकाव्य ‘पद्मावत’ (1540 ई.)

1. रानी पद्मिनी और चित्तौड़ का प्रथम साका (1303 ई.)

जब दिल्ली के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी ने 1303 में चित्तौड़गढ़ पर आक्रमण किया, तब राजस्थान के इतिहास का सबसे बड़ा और गौरवशाली ‘साका’ हुआ:

  • केसरिया: रावल रतन सिंह और उनके वीर सेनापति गोरा व बादल ने लड़ते हुए वीरगति प्राप्त की।

  • जौहर: रानी पद्मिनी ने अपनी मर्यादा की रक्षा के लिए 16,000 महिलाओं के साथ जलती हुई चिता में कूदकर आत्मदाह कर लिया। यह चित्तौड़गढ़ का प्रथम जौहर था।


2. ‘पद्मावत’ की प्रसिद्ध कथा (जायसी के अनुसार)

मलिक मोहम्मद जायसी ने अपनी रचना में इस कहानी को बहुत विस्तार और रोमांच के साथ लिखा है:

  1. सिंहल द्वीप की राजकुमारी: पद्मिनी सिंहल द्वीप (वर्तमान श्रीलंका) के राजा गंधर्वसेन की पुत्री थीं।

  2. हीरामन तोता: कहा जाता है कि एक बोलने वाले तोते (हीरामन) ने रावल रतन सिंह को पद्मिनी की सुंदरता के बारे में बताया था, जिसके बाद रतन सिंह उनसे विवाह कर चित्तौड़ लाए।

  3. राघव चेतन का विश्वासघात: राजा द्वारा निष्कासित पंडित राघव चेतन ने अलाउद्दीन खिलजी को पद्मिनी की सुंदरता के बारे में बताकर उसे चित्तौड़ पर आक्रमण के लिए उकसाया।

  4. दर्पण में प्रतिबिंब: एक प्रचलित कथा के अनुसार, खिलजी ने रानी को देखने की शर्त रखी थी और उसे दर्पण (शीशे) में रानी का प्रतिबिंब दिखाया गया था (हालांकि कई इतिहासकार इस ‘दर्पण वाली बात’ को काल्पनिक मानते हैं)।


3. गोरा और बादल का शौर्य

रानी पद्मिनी के प्रसंग में उनके चाचा गोरा और भाई बादल का नाम अमर है। जब खिलजी ने छल से रतन सिंह को बंदी बना लिया था, तब गोरा और बादल ने पालकियों में सैनिकों को बिठाकर दिल्ली में घुसकर राजा को मुक्त कराया था। इस युद्ध में वे वीरतापूर्वक लड़ते हुए शहीद हुए।


4. ऐतिहासिक महत्व और विरासत

  • चित्तौड़गढ़ किला: आज भी चित्तौड़ के किले में ‘पद्मिनी महल’ और वह स्थान मौजूद है जहाँ जौहर की ज्वाला प्रज्वलित हुई थी।

  • जौहर मेला: चित्तौड़गढ़ में हर साल रानी पद्मिनी और अन्य वीरांगनाओं की याद में ‘जौहर मेला’ आयोजित किया जाता है।

  • सम्मान का प्रतीक: पद्मिनी केवल एक रानी नहीं, बल्कि भारतीय नारी के उस दृढ़ संकल्प का प्रतीक हैं जिसने सत्ता और विलासिता के आगे झुकने के बजाय मृत्यु को गले लगाना बेहतर समझा।


इतिहासकारों का मत

जहाँ ‘पद्मावत’ इसे एक प्रेम कहानी और बदले की गाथा बताता है, वहीं कर्नल जेम्स टॉड और मुहणोत नैणसी जैसे इतिहासकारों ने भी रानी पद्मिनी के अस्तित्व और उनके जौहर की पुष्टि की है। हालांकि, आधुनिक इतिहासकार खिलजी के आक्रमण का मुख्य कारण चित्तौड़ की सामरिक और व्यापारिक स्थिति (Strategic Location) को मानते हैं।

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