राजस्थान के इतिहास में जयमल मेड़तिया और फत्ता (फतेह सिंह) सिसोदिया का नाम वीरता, बलिदान और स्वामीभक्ति का सर्वोच्च प्रतीक माना जाता है। इन दोनों वीरों ने 1567-68 ईस्वी में अकबर के चित्तौड़गढ़ आक्रमण के दौरान जो साहस दिखाया, उससे स्वयं अकबर भी दंग रह गया था।
यहाँ उनके बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है:
1. परिचय: कौन थे ये वीर?
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जयमल मेड़तिया: ये मेड़ता (नागौर) के शासक थे। जब अकबर ने मेड़ता पर अधिकार कर लिया, तो जयमल मेवाड़ के महाराणा उदय सिंह की शरण में आ गए थे।
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फत्ता सिसोदिया: ये आमेट के जागीरदार थे और मेवाड़ के एक अत्यंत प्रभावशाली और बहादुर सेनापति थे।
जब अकबर ने चित्तौड़ को घेरा, तो महाराणा उदय सिंह सामंतों की सलाह पर किले की जिम्मेदारी इन दोनों को सौंपकर खुद गोगुंदा की पहाड़ियों में चले गए थे।
2. चित्तौड़गढ़ का तीसरा साका (1567-68)
अकबर की विशाल सेना ने किले को चारों तरफ से घेर लिया था। महीनों तक घेराबंदी चली, लेकिन राजपूतों ने समर्पण नहीं किया।
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जयमल की वीरता: एक रात जब जयमल किले की टूटी हुई दीवार की मरम्मत करवा रहे थे, तब अकबर ने अपनी ‘संग्राम’ नामक बंदूक से उन पर गोली चला दी। इससे जयमल के पैर में गंभीर चोट आई और वे चलने में असमर्थ हो गए।
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कल्ला जी राठौड़ का साथ: अगले दिन जब अंतिम युद्ध (शाका) का समय आया, तो जयमल युद्ध करना चाहते थे लेकिन चल नहीं सकते थे। तब उनके भतीजे कल्ला जी राठौड़ ने जयमल को अपने कंधों पर बिठाया। दो हाथ जयमल के और दो हाथ कल्ला जी के—इस दृश्य को देखकर मुगलों को लगा जैसे ‘चार हाथों वाले लोकदेवता’ युद्ध कर रहे हों।
3. फत्ता सिसोदिया का बलिदान
फत्ता सिसोदिया ने भी युद्ध में अद्भुत पराक्रम दिखाया। उनकी पत्नी रानी फूलकँवर (जो जयमल की बहन थीं) ने हजारों महिलाओं के साथ किले के भीतर जौहर किया। इसके बाद फत्ता ने केसरिया बाना पहनकर मुगलों पर काल बनकर हमला किया और लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए।
4. अकबर का सम्मान (पत्थर की मूर्तियाँ)
अकबर ने अपने जीवन में कई युद्ध जीते, लेकिन चित्तौड़ के इन वीरों ने उसे सबसे कड़ी टक्कर दी थी। उनकी वीरता से प्रभावित होकर:
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अकबर ने आगरा के किले के मुख्य द्वार (हाथी पोल) पर जयमल और फत्ता की हाथी पर सवार पत्थर की विशाल मूर्तियाँ लगवाई थीं।
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यह भारतीय इतिहास का एक दुर्लभ उदाहरण है जहाँ एक विजेता ने अपने दुश्मनों की बहादुरी के सम्मान में उनकी मूर्तियाँ बनवाई हों।
नोट: बाद में औरंगजेब ने इन मूर्तियों को तुड़वा दिया था, लेकिन आज भी बीकानेर के जूनागढ़ किले के दरवाजे पर इनकी मूर्तियाँ स्थापित हैं।
5. ऐतिहासिक महत्व
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कहावत: राजस्थान में आज भी कहा जाता है— “गढ़ तो चित्तौड़गढ़, बाकी सब गढ़ैया”, और इस गौरव को बनाए रखने में जयमल-फत्ता का सबसे बड़ा योगदान है।
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छतरियाँ: चित्तौड़गढ़ किले के भैरव पोल और हनुमान पोल के बीच आज भी जयमल और कल्ला जी की छतरियाँ बनी हुई हैं, जहाँ पर्यटक उन्हें नमन करते हैं।
इन दोनों वीरों ने साबित किया कि संख्या बल कम होने के बावजूद, आत्मसम्मान और मातृभूमि की रक्षा के लिए कैसे अंतिम सांस तक लड़ा जाता है।