मुगल सम्राट शाहजहाँ (खुर्रम) का राजस्थान के साथ संबंध उसके पिता जहाँगीर और दादा अकबर की तुलना में काफी अलग था। शाहजहाँ के समय में युद्धों की जगह कूटनीति, निर्माण और सांस्कृतिक आदान-प्रदान अधिक रहा।
यहाँ शाहजहाँ और राजस्थान के संबंधों का पूरा विवरण दिया गया है:
1. राजाओं के साथ संबंध और गठबंधन
शाहजहाँ के काल में राजस्थान के कई शासक मुगल दरबार के सबसे शक्तिशाली स्तंभ बन गए थे:
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मिर्जा राजा जयसिंह (आमेर): शाहजहाँ के सबसे विश्वसनीय सेनापति। शाहजहाँ ने ही जयसिंह को ‘मिर्जा राजा’ की उपाधि दी थी। जयसिंह ने शाहजहाँ के लिए कंधार और मध्य एशिया के कई अभियानों का नेतृत्व किया।
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महाराजा जसवंत सिंह (जोधपुर): शाहजहाँ ने इन्हें महाराजा की पदवी दी और इन्हें मुगल सेना में ऊँचा मनसब (7000) दिया। शाहजहाँ के अंतिम समय में उत्तराधिकार के युद्ध में जसवंत सिंह ने शाहजहाँ के बेटे दारा शिकोह का साथ दिया था।
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राव रतन सिंह (बूंदी): इनके साथ भी शाहजहाँ के मधुर संबंध थे।
2. मेवाड़ के साथ संबंध: संधि और विद्रोह
शाहजहाँ का मेवाड़ से बहुत पुराना और व्यक्तिगत रिश्ता था:
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मेवाड़-मुगल संधि (1615): जब शाहजहाँ शहजादा (खुर्रम) था, तब उसी ने महाराणा अमर सिंह को संधि के लिए राजी किया था। इस दौरान वह काफी समय तक मेवाड़ में रहा।
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महाराणा जगत सिंह के साथ तनाव: 1652 में जब महाराणा जगत सिंह ने चित्तौड़गढ़ किले की मरम्मत करानी शुरू की (जो संधि के खिलाफ था), तब शाहजहाँ ने सादुल खाँ के नेतृत्व में एक बड़ी सेना भेजी और किले की नई दीवारों को तुड़वा दिया था।
3. राजस्थान में निर्माण कार्य
शाहजहाँ अपनी वास्तुकला (Architecture) के प्रेम के लिए जाना जाता है, और इसका प्रभाव राजस्थान में भी दिखा:
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आनासागर झील की बारादरी (अजमेर): शाहजहाँ ने अजमेर की आनासागर झील के किनारे सफेद संगमरमर की पाँच सुंदर बारादरियाँ (मंडप) बनवाई थीं। यह आज भी पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र है।
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अजमेर दरगाह में निर्माण: उसने ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में एक सुंदर सफेद संगमरमर की मस्जिद बनवाई, जिसे ‘शाहजहानी मस्जिद’ कहा जाता है।
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जग मंदिर पैलेस (उदयपुर) का प्रभाव: जब शाहजहाँ ने अपने पिता जहाँगीर के खिलाफ विद्रोह किया था, तब उसने उदयपुर के जग मंदिर (पिछोला झील) में शरण ली थी। कहा जाता है कि जग मंदिर की वास्तुकला और पत्थर के काम को देखकर ही उसे बाद में ताजमहल बनाने की प्रेरणा मिली थी।
4. युद्ध और सैन्य अभियान
शाहजहाँ के समय राजस्थान की भूमि पर कोई बहुत बड़ा निर्णायक युद्ध नहीं हुआ, लेकिन राजस्थान की सेनाओं ने शाहजहाँ के लिए पूरे भारत और सीमावर्ती इलाकों में युद्ध लड़े:
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कंधार अभियान: आमेर के राजा जयसिंह ने शाहजहाँ के आदेश पर अफगानिस्तान के कंधार क्षेत्र में कई युद्ध लड़े।
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उत्तराधिकार का युद्ध (धर्मत का युद्ध): जब शाहजहाँ बीमार पड़ा और उसके बेटों (दारा और औरंगजेब) में युद्ध हुआ, तब राजस्थान की सेनाएँ दो हिस्सों में बंट गईं। जोधपुर के जसवंत सिंह ने शाहजहाँ की तरफ से औरंगजेब के खिलाफ धर्मत का युद्ध लड़ा था।
5. शाहजहाँ की राजपूत नीति
शाहजहाँ ने अकबर की तरह राजपूतों को अपना मित्र बनाए रखा, लेकिन उसने धीरे-धीरे राजपूतों के आंतरिक मामलों में दखल देना शुरू कर दिया था। उसने एक ही बड़ी रियासत को दो भागों में बांटने की नीति भी अपनाई (जैसे कोटा को बूंदी से अलग करना)।
निष्कर्ष:
शाहजहाँ के काल में राजस्थान की कला और स्थापत्य में सफेद संगमरमर का प्रयोग बढ़ा। उसके समय में आमेर और मारवाड़ की शक्ति अपने चरम पर थी, और राजस्थान के राजा मुगलों की विदेश नीति (Foreign Policy) को तय करने में बड़ी भूमिका निभा रहे थे।