राव सीहा (1240–1273)

राव सीहा मारवाड़ के राठौड़ राजवंश के आदि पुरुष (संस्थापक) माने जाते हैं। उनके बारे में उपलब्ध जानकारी ऐतिहासिक अभिलेखों (जैसे बिट्ठू शिलालेख) और राजस्थानी ख्यातों (नैणसी री ख्यात) पर आधारित है।

यहाँ राव सीहा के जीवन का हर एक सूक्ष्म विवरण दिया गया है:


1. पारिवारिक पृष्ठभूमि और उत्पत्ति

  • मूल: राव सीहा को कन्नौज के गहड़वाल राजा जयचंद का वंशज (पौत्र) माना जाता है।

  • कन्नौज का पतन: मोहम्मद गौरी के आक्रमण के बाद जब कन्नौज का पतन हुआ, तो उनके वंशज पश्चिम की ओर बढ़े।

  • माता-पिता: ख्यातों के अनुसार इनके पिता का नाम सेतराम था।

  • राजस्थान आगमन: वे अपनी सेना के साथ 13वीं शताब्दी की शुरुआत में पुष्कर (अजमेर) आए और फिर पाली की ओर बढ़े।

2. मारवाड़ में स्थापना और प्रमुख युद्ध

राव सीहा एक शासक से ज्यादा एक “योद्धा और रक्षक” के रूप में जाने जाते थे:

  • पाली के ब्राह्मणों की सहायता: उस समय पाली के ‘पालीवाल ब्राह्मण’ मेर और मीणा लुटेरों से परेशान थे। उन्होंने सीहा से मदद मांगी। सीहा ने लुटेरों को हराकर पाली में अपना प्रभाव स्थापित किया।

  • लाखा झंवर का युद्ध: यह उनके जीवन का सबसे भीषण युद्ध था। पाली की रक्षा के लिए उन्होंने मुस्लिम आक्रमणकारियों (संभवतः सुल्तान नासिरुद्दीन की सेना या स्थानीय सूबेदार) से युद्ध किया।

  • वीरगति: राव सीहा 1273 ईस्वी (विक्रम संवत 1330) में ‘बिट्ठू’ (पाली) नामक स्थान पर गायों की रक्षा करते हुए और मुस्लिम सेना से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए।

3. निर्माण कार्य और स्मारक

राव सीहा का काल निरंतर युद्धों का था, इसलिए उन्होंने भव्य महलों का निर्माण नहीं करवाया, लेकिन उनके नाम से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण स्थल हैं:

  • बिट्ठू का शिलालेख (Bithu Inscription): यह सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य है। पाली के पास बिट्ठू गाँव में राव सीहा का स्मारक (देवल) बना हुआ है। इसमें उनकी मृत्यु की तिथि अंकित है।

  • धोला चबूतरा: पाली में वह स्थान जहाँ उन्होंने पहली बार डेरा डाला था।

4. राजदरबार, कवि और लेखक

चूँकि सीहा एक “योद्धा” थे और एक व्यवस्थित साम्राज्य की स्थापना के शुरुआती चरण में थे, इसलिए उनके पास बाद के राजाओं जैसा भव्य दरबार नहीं था। फिर भी:

  • चारण और भाट: राजस्थानी परंपरा के अनुसार, उनके साथ कन्नौज से कुछ चारण कवि आए थे जिन्होंने उनके पराक्रम को गीतों (दूहा) में पिरोया।

  • ख्यातों में वर्णन: ‘मुहणौत नैणसी’ और ‘बांकीदास’ ने अपनी ख्यातों में सीहा को एक अलौकिक शक्ति वाले वीर के रूप में वर्णित किया है।

5. अन्य महत्वपूर्ण सूक्ष्म तथ्य

  • सोलंकी राजकुमारी से विवाह: उन्होंने भीनमाल के सोलंकी राजा की पुत्री से विवाह किया था, जिससे उन्हें राजनीतिक मजबूती मिली।

  • अश्वारोही प्रतिमा: बिट्ठू के स्मारक में उन्हें एक घोड़े पर सवार योद्धा के रूप में दिखाया गया है, जिसके पास उनकी पत्नी का चित्र है (जो उनके साथ सती हुई थीं)।

  • कुलदेवी: उनके समय में ही राठौड़ों की कुलदेवी नागणेची माता (चक्रेश्वरी) की पूजा का आधार तैयार हुआ (हालांकि मूर्ति उनके वंशज राव धूहड़ लाए थे)।

निष्कर्ष

राव सीहा ने मारवाड़ में कोई बहुत बड़ा साम्राज्य नहीं छोड़ा था, लेकिन उन्होंने वह ‘राठौड़ बीज’ बोया जिसने आगे चलकर राव जोधा और राव मालदेव जैसे महान शासकों को जन्म दिया। पाली का वह छोटा सा क्षेत्र ही आगे चलकर विशाल ‘जोधपुर राज्य’ बना।

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