मुगल सम्राट औरंगजेब का राजस्थान के साथ संबंध सबसे ज्यादा तनावपूर्ण और संघर्षों से भरा रहा। जहाँ अकबर और शाहजहाँ ने राजपूतों को अपना मित्र बनाया, वहीं औरंगजेब की कट्टर नीतियों के कारण राजस्थान की लगभग सभी प्रमुख रियासतें उसके खिलाफ खड़ी हो गईं।
राजस्थान के संदर्भ में औरंगजेब का इतिहास इन 4 मुख्य भागों में समझा जा सकता है:
1. मारवाड़ (जोधपुर) के साथ 30 वर्षीय संघर्ष
यह औरंगजेब के जीवन की सबसे बड़ी राजनीतिक गलती मानी जाती है।
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जसवंत सिंह की मृत्यु: 1678 में जोधपुर के महाराजा जसवंत सिंह की मृत्यु के बाद औरंगजेब ने मारवाड़ को ‘खालसा’ (सीधे मुगल नियंत्रण में) घोषित कर दिया।
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अजीत सिंह और दुर्गादास राठौड़: जसवंत सिंह के पुत्र अजीत सिंह को औरंगजेब ने कैद करने की कोशिश की, लेकिन वीर दुर्गादास राठौड़ ने उन्हें सुरक्षित निकाल लिया। इसके बाद मारवाड़ और मुगलों के बीच 30 साल तक युद्ध चला। दुर्गादास को ‘राठौड़ों का यूलिसेस’ कहा जाता है।
2. मेवाड़ और औरंगजेब (जजिया कर का विरोध)
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जजिया कर: 1679 में जब औरंगजेब ने हिंदुओं पर दोबारा ‘जजिया कर’ लगाया, तो मेवाड़ के महाराणा राजसिंह ने इसका कड़ा विरोध किया और औरंगजेब को एक चेतावनी भरा पत्र लिखा।
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चारुमती विवाद: किशनगढ़ की राजकुमारी चारुमती से औरंगजेब विवाह करना चाहता था, लेकिन महाराणा राजसिंह ने उनसे विवाह करके औरंगजेब को चुनौती दी।
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देबारी का युद्ध (1680): औरंगजेब ने मेवाड़ पर हमला किया, लेकिन महाराणा राजसिंह और उनके पहाड़ी छापामार युद्ध के सामने मुगलों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
3. आमेर (जयपुर) के साथ संबंध
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मिर्जा राजा जयसिंह: शुरुआत में जयसिंह औरंगजेब के सबसे बड़े सेनापति थे (इन्होंने ही शिवाजी महाराज को पुरंदर की संधि के लिए विवश किया था)। लेकिन बाद में औरंगजेब ने उन पर शक करना शुरू कर दिया।
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सवाई जयसिंह: औरंगजेब ने जयसिंह द्वितीय की बुद्धि से प्रभावित होकर उन्हें ‘सवाई’ की उपाधि दी थी (जो बाद में जयपुर के राजाओं की स्थायी पदवी बन गई)। हालांकि, औरंगजेब के अंतिम समय में सवाई जयसिंह ने भी मुगलों के खिलाफ विद्रोह कर दिया था।
4. धार्मिक नीति और मंदिर तोड़ना
औरंगजेब की कट्टरता का असर राजस्थान के मंदिरों पर भी पड़ा:
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उसने अजमेर और पुष्कर के कई मंदिरों को नुकसान पहुँचाया।
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इसी दौरान श्रीनाथजी (नाथद्वारा) और द्वारकाधीश (कांकरोली) की मूर्तियाँ ब्रज (मथुरा) से राजस्थान लाई गई थीं, जिन्हें महाराणा राजसिंह ने संरक्षण दिया और वहां भव्य मंदिर बनवाए।
प्रमुख युद्ध और घटनाएं
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शहजादा अकबर का विद्रोह (1681): औरंगजेब के अपने बेटे, शहजादा अकबर ने राजपूतों के साथ मिलकर अपने पिता के खिलाफ विद्रोह कर दिया था। दुर्गादास राठौड़ ने उसे संरक्षण दिया था।
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धर्मत का युद्ध (1658): औरंगजेब ने गद्दी पाने के लिए अपने भाई दारा शिकोह और मारवाड़ की सेना (जसवंत सिंह) को हराया था।
निष्कर्ष
औरंगजेब की “राजपूत विरोधी नीति” ने मुगल साम्राज्य के पतन की नींव रखी। उसने उन वफादार राजपूतों को अपना दुश्मन बना लिया जो कभी मुगल साम्राज्य के कवच हुआ करते थे। उसकी मृत्यु (1707) के बाद राजस्थान की रियासतों ने खुद को स्वतंत्र घोषित करना शुरू कर दिया।